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Monday, March 19, 2012

कत्लखाने बंद करो

वोट बैंक की लालच में सरकारें मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कत्लखाने खुलवा रही है। आज हमाई गायें काटी जा रही हैं , कल को ये लोग हिन्दुओं की बोटियाँ काटकर खाएं तो भी कोई आश्चर्य नहीं होगा। ये हमें गुलाम बनाने बाद हमें समूल नष्ट भी करना चाहते हैं। इस्लाम की दरिंदगी भुगतने से बेहतर से बेहतर है इस जल्लाद सरकार को गिरा दिया जाए, फिर ऐसी सरकार आये जिसके राज में इंसान और जानवर दोनों सुकून और अमनोचैन की ज़िन्दगी बसर कर सकें।

Zeal

Friday, October 28, 2011

'लाश' खाने के शौक़ीन हैं आप ?




जब खाने के लिए प्रकृति ने भाँती-भाँती की वनस्पतियाँ, फल और अनाज उपलब्ध करा दिए हों तो हिंसक पशुओं के समान 'लाश' के टुकड़े खाने की क्या आवश्यकता है ?


कम से कम उन पशुओं से ही कुछ सीखिए जिनके मृत शवों को आप खाते हैं। बेचारे बेजुबान पशु (गाय, ऊंट, बकरी, सुवर , मुर्गी आदि) तो शाक भाजी ही खाते हैं , लेकिन आप जैसे दरिन्दे इनके मांस का भक्षण करते हैं।

एक बकरीद आने की देर है , करोड़ों की संख्या में बेजुबान पशु हलाल कर दिए जायेंगे। बेदर्द और हिंसक आदमजात बैठकर इनकी लाश की दावत करेगी।

धिक्कार है ऐसी आदमीयत पर जिसमें मानवीयता का अभाव हो। लाश का सेवन करने वालों से मानवीय संवेदनाओं को समझ सकने की अपेक्षा व्यर्थ है।

ऐसे लोग हिंसक होते हैं तथा समाज में हिंसा और आतंकवाद को ही बढ़ावा देते हैं।

हमारी सरकार को चाहिए की भारत देश में पशुओं के हलाल पर पूर्णतया पाबंदी लगा दे। जिसे अपनी जबान के चटोरेपन पर नियंत्रण न हो वे तुर्किस्तान अथवा पाकिस्तान में जाकर निवास करें ।

हिंदुस्तान को सात्विक ही रहने दें।

Zeal