समय गतिमान है , उसके साथ ही व्यक्ति और परिस्थिति दोनों बदलती रहती है। जो समय के साथ नहीं बदलता , वो बहुत पीछे छूट जाता है। प्रतिदिन और हर पल हम हज़ारों अनुभवों से दो-चार होते हैं । यदि हम में उन अनुभवों और अपनी गलतियों से सीखने की प्रवित्ति ही नहीं होगी तो जीवन व्यर्थ है।
इश्वर के सिवा ऐसा कोई भी नहीं जो गलतियाँ न करता करता हो । नित्य प्रतिदिन कुछ न कुछ गलतियाँ मैं भी करती हूँ , सुधार जारी है , जो मृत्यु पर्यंत जारी रहेगा। और यही संघर्ष मुझे मनुष्य बनाए रखता है।
आभार ।