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Thursday, February 24, 2011

मुट्ठी भर सौभाग्य ..

आज एक ब्लोगर मित्र ने कहा -

  • अगर तुम अपने आपको एक बड़ी लेखिका समझती हो तो तुम गलत हो ।
  • लोग तुम्हारी झूठी प्रशंसा करते हैं , और तुम बहुत खुश हो जाती हो । सच्चाई के धरातल पर रहो तो बेहतर होगा ।

मैं लिखती ज़रूर हूँ लेकिन खुद को कभी लेखिका नहीं समझा । पहले इंग्लिश में लिखती थी तो सभी ने हिंदी में लिखने को प्रेरित किया । पहले हिंदी में लिखना बहुत दुष्कर लगता था , फिर धीरे-धीरे शब्दों के सही उच्चारण के साथ लिखना सीख लिया । मन की भावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम और एक स्थान मिल गया । आस पास परिवेश में जो विसंगतियां हैं , उस पर लिखने लगी । लेकिन अच्छी तरह जानती हूँ की मैं लेखिका नहीं हूँ । जिसने कभी साहित्य ही न पढ़ा हो , वो लेखिका कैसे बन सकता है । मैंने खुद को कभी बड़ा नहीं समझा । मुझे अपनी कमतरी का पूरा -पूरा एहसास है । आभार तो उन पाठकों का है , जिन्होंने मुझे कभी नीचा नहीं दिखाया , बल्कि मेरे छोटे-छोटे प्रयासों का भी मान रखा ।

रही बात प्रशंसा की तो कोई किसी की झूठी प्रशंसा क्यूँ करेगा । अगर कोई दो मीठे शब्द प्रोत्साहित करने के लिए लिख देता है , तो वही मेरा पुरस्कार है और मेरा मुट्ठी भर सौभाग्य । वर्ना जिंदगी में खुद पर मुस्कुराने के लिए मेरे पास है ही क्या ?

नौकरी करती नहीं हूँ , जहाँ मेरे काम की कोई प्रशंसा होगी । कोई salary मिलनी नहीं है । कोई incentive मिलना नहीं है । कोई appreciation मिलना नहीं है । कोई promotion होना नहीं है ।

ब्लॉग लेखन से भी प्यार कम नफरत ज्यादा पायी ।

कोई 'लोहारिन' कहता है ,
कोई 'लौहांगना' ,
कोई 'जंग लगा लोहा'
कोई 'माटी का माधव' ।

इन उपाधियों के बावजूद , अगर एक-दो लोग मीठा बोल ही देते हैं और मुझे थोड़ी सी ख़ुशी मिल ही जाती है तो बुरा क्या है

एक निवेदन -

कभी मेरी झूठी प्रसंसा मत कीजियेगा । मैं सचमुच उसे सच ही मान लेती हूँ । जब कोई बताता है की ये झूठी प्रशंसा थी तो मन विरक्ति से भर जाता है ।

और यदि कभी मैं आपकी प्रशंसा करूँ , तो उसे सच ही समझिएगा , क्यूंकि जब भी किसी की प्रशंसा करती हूँ तो ह्रदय से करती हूँ , दिखावे की नहीं ।

आभार ।