सदियों पहले मुगलों ने भारत पर आक्रमण किया और कई वर्षों तक हमारे ऊपर राज किया। फिर अंग्रेज आये और उन्होंने हमें लूटना शुरू किया । हम गरीब तो थे ही , कायर भी निकले। गुलामी में जकड़े रहना शायद हमें सुकून देता है। जैसे सुवर को कीचड में रहने का जो आनंद है , वो उसे कहीं नहीं मिलता।
फिर देश के कुछ सपूत- सरदार भगत सिंह , वल्लभ भाई पटेल, चन्द्र शेखर आजाद , सुभाष चन्द्र बोस , महात्मा गाँधी और अनेकानेक स्त्री-पुरुष , जिन्होंने अपने प्राणों की कुर्बानी देकर इस देश को आजाद कराया ।
देश के आजाद होने के साथ ही , गद्दारों ने अपने लिए एक पृथक राष्ट्र की मांग की और १४ अगस्त की रात को भारत माता के दो टुकड़े कर दिए गए। गद्दारों को फिर भी चैन नहीं आया और पिछले ६३ वर्षों से काश्मीर की मांग कर रहे हैं। जगह-जगह मंदिरों को ध्वस्त करके हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सोमनाथ का मंदिर और रामकोट का मंदिर ढहाना इसके ज्वलंत उदाहरण हैं ।
वो मुसलमान क्या भारतीय नहीं थे जिन्होंने भारत विभाजन की मांग की थी ? और जो मुसलमान आज भारत में रह रहे हैं क्या वो किसी भी कोण से भारतीय हैं ? क्या बाबरी मस्जिद के लिए सतत मांग उनकी काश्मीर के लिए पृथक मांग उनके भारतीय होने को दर्शाती है ?
क्या वो अपने जीवन में एक बार भी भारतीय होने का दायित्व नहीं निभा सकते । क्या एक बार ये जिहाद नहीं कर सकते की काश्मीर भारत का अभिन्न अंग है । काश्मीर का मुसलमान बच्चा -बच्चा भी आज सड़कों पर आन्दोलन कर रहा है की काश्मीर पकिस्तान को मिलना चाहिए। हमारे जवान अपनी जान देकर उनकी रक्षा कर रहे हैं और वो उन पर ही पत्थर बरसाकर विद्रोह कर रहे हैं। क्या ये मुसलमान भारतीय कहलाने के योग्य हैं ?
मुसलमानों का परचम आज इसलिए लहरा रहा है क्यूंकि वो कायर नहीं हैं। अपने मजहब का सम्मान करते हैं तथा अपना ईमान बेच कर खा नहीं गए हैं। बल्कि इनके पास हिन्दुओं का ईमान खरीदने की बेशुमार ताकत और दौलत है । ये जिस देश में रहते वहीँ की थाली में छेद करते हैं। हिन्दुस्तान में रहकर इस्लाम का प्रचार करते हैं। हिन्दू ग्रंथों और संहिताओं का आधा अधूरा अध्यन कर , तथ्यों को तोड़ मरोड़ का पेश करना इनका प्रिय शगल हो गया है।
इस्लाम के कट्टर प्रचारकों से मेरा ये कहना है की जब तक श्रद्धा न हो , दुसरे धर्म के ग्रन्थ न पढ़ा करें। क्यूंकि किसी धर्म के ग्रन्थ पढ़कर उसे अपमानित करके , आप स्वयं अपनी मानसिकता का परिचय देते हैं और अपने धर्म इस्लाम को बट्टा लगा रहे होते हैं। किसी को नीचा दिखाकर आप कभी ऊपर नहीं उठ सकेंगे। ईर्ष्या की अग्नि से आप जल रहे हैं, खुद को भस्म कर रहे हैं और मानवता को त्रस्त कर रहे हैं। भारतीय होने का फर्ज निभाइए । भारत विभाजन के बाद आप हमारे घर में एक मेहमान की तरह रह रहे है। इसलिए अनाधिकार चेष्टाओं से बचिए। उछल-कूद करने का शौक ज्यादा हो तो पड़ोस में [ पकिस्तान] में अपने बंधू-बांधवों के साथ रहिये।
कांग्रेस का अर्थ हैं- 'सभा' जहाँ पूर्वाग्रहों से रहित विचार विमर्श हो सके। लेकिन आज कांग्रेस , सिर्फ एक मानसिकता बनके रह गयी है । यहाँ लोग सेक्युलेरिज्म को भुना रहे हैं ! आखिर कब तक धर्म-निरपेक्षता के नाम पर बेच कर खाते रहेंगे अपने देश को ? यहाँ लोग अपने निजी हितों के लिए एक जुट होकर पापड बेल रहे हैं । देश के हित से इन्हें कोई लेना देना नहीं है। नेहरु से लेकर प्रपौत्र राहुल तक सभी इसी मानसिकता के गुलाम हैं। क्यूंकि शोहरत और कुर्सी पाने का सबसे आसान रास्ता है , मुसलामानों के फेवर में बोलो और गद्दी हथियाओ । फिर मुसलामानों से वोट बैंक छिन न जाये , इसलिए मुसलामानों की हर जायज और नाजायज मांगों को मानते चलो और उनकी आतंकवादी सरगर्मियों को भुलाते चलो जैसे शहीदों को भुला दिया है।
ये कांग्रेसी मानसिकता जो हिंदुत्व को ख़तम करेगी और देश को तीसरी बार गुलाम करेगी , बहुत तेजी से , एक संक्रामक रोग की तरह बढ़ रही है। हर तीसरा हिन्दू , मुसलमान की गौरव-गाथा में लिप्त दिखाई दे रहा है। बहुत शीघ्र ही इसकी भी जरूरत नहीं पड़ेगी क्यूंकि हमारी कायरता हमें उनका गुलाम बना देगी और फिर हम आरती की हिन्दू-थाली सजाकर उनका तिलक करते मिलेंगे।
बाबरी मस्जिद विवाद पर निर्णय से मसलमानों का तो रक्त खौल गया। उन्होंने १०, ००० पृष्ठों के निर्णय को बिना पढ़े ही एलान कर दिया की ये बईमानी है और वो सुप्रीम कोर्ट से पूरा का पूरा लेकर ही दम लेंगे। अरे आधे हिन्दुस्तान से दिल नहीं भरा तो आधे जन्मस्थान से उनका क्या होगा । उन्हें तो दो चाहिए एक से उनका क्या होगा ।
जनाब आप दो लीजिये। पकिस्तान के साथ हिन्दुस्तान फ्री लीजिये।
आभार ।