मोहन की चुप्पी , मैडम की व्याधि , कला नीला पीला धन , भ्रष्टाचार, व्याभिचार , अनाचार , आतंकवाद, रिश्वतखोरी, सीनाजोरी, भाजापाई और आतातायी , मोदी औ मित्तल , क्रिकेट और हॉकी , लाफ्टर शो और रियलिटी शो , अनशन और आन्दोलन , कहीं परचा लीक तो कहीं विकी लीक । इतने सारे अनगिनत मुद्दे और विषय हैं फिर भी हिंदी ब्लॉगजगत में जिधर जाओ उधर इस 'नामुराद-दिव्या' पर ही पोस्टें लिखी मिलती हैं। हमें तो पता ही नहीं था की हम इतने बड़े आतंकवादी हैं।
बड़ी मुश्किल से समय निकाला की चलो कुछ अच्छी पोस्टें पढ़ी जाएँ । लेकिन यह क्या ?.. क्रम से जितने ही ब्लौग पर गयी तो देखा सभी पोस्ट इस 'नालायक-दिव्या' पर ही लिखी हुयी थीं। हम तो अचंभित हो गए की भैया हम कौनो गुनाह तो नहीं कीन्हा तौ काहे हमरे ऊपर सभय कुर्बान हुए जात हैं।
पोस्ट मेरे ब्लौग की,
जित देखूं तित पोस्ट,
पोस्ट पढ़न को मैं चली ,
मैं ही बन गयी पोस्ट,
ब्लौग लिखते हुए जुम्मे-जुम्मे १५ महीने ही हुए हैं और हम ही मुद्दा बन गए हैं ? लोगों ने भ्रष्टाचार और त्यौहार भुला दिए हैं , मोहन और मोदी को भी बिसरा दिया है , बस मुई-दिव्या ही सबके 'जी का जंजाल' बनी हुयी है।
अब आप ही बताएं मैं उदास रहूँ या खुश रहूँ ? चकित होऊं या मौन रहूँ?
Zeal
बड़ी मुश्किल से समय निकाला की चलो कुछ अच्छी पोस्टें पढ़ी जाएँ । लेकिन यह क्या ?.. क्रम से जितने ही ब्लौग पर गयी तो देखा सभी पोस्ट इस 'नालायक-दिव्या' पर ही लिखी हुयी थीं। हम तो अचंभित हो गए की भैया हम कौनो गुनाह तो नहीं कीन्हा तौ काहे हमरे ऊपर सभय कुर्बान हुए जात हैं।
पोस्ट मेरे ब्लौग की,
जित देखूं तित पोस्ट,
पोस्ट पढ़न को मैं चली ,
मैं ही बन गयी पोस्ट,
ब्लौग लिखते हुए जुम्मे-जुम्मे १५ महीने ही हुए हैं और हम ही मुद्दा बन गए हैं ? लोगों ने भ्रष्टाचार और त्यौहार भुला दिए हैं , मोहन और मोदी को भी बिसरा दिया है , बस मुई-दिव्या ही सबके 'जी का जंजाल' बनी हुयी है।
अब आप ही बताएं मैं उदास रहूँ या खुश रहूँ ? चकित होऊं या मौन रहूँ?
Zeal