Showing posts with label निर्मल-हास्य. Show all posts
Showing posts with label निर्मल-हास्य. Show all posts

Wednesday, June 22, 2011

सभी ब्लॉगर्स के लिए खुशखबरी .

आजकल समाचार में दस वर्षीय 'अवतार' नामक बच्चे को देखकर , जिसका पुनर्जन्म हुआ है , पर मंथन किया। पुनर्जन्म होता है आत्माएं नया शरीर धारण करती हैं। लेकिन अधिकांशतः पूर्वजन्म की स्मृतियाँ शेष नहीं रह जातीं , इसलिए पता नहीं चल पाता की किस व्यक्ति का कहाँ जन्म हुआ है।

जैसे पंजाब के 'सुभाष' का जन्म 'अवतार' नामक राजस्थानी बालक के रूप में हुआ है , जिसे अपने माता-पिता , भाई-बहन , पत्नी आदि सभी याद हैं यहाँ तक की उसे पंजाबी भाषा भी अच्छी तरह आती है। लेकिन उसका पूर्व जन्म में क़त्ल हुआ था , इसलिए शायद आत्मा पर एक बोझ के तहत पुनर्जन्म हुआ। यदि कुछ पेंडिंग नहीं रहता तो शायद मोक्ष मिल जाता

इसी समाचार पर मनन करते हुए स्वतः ही ब्लॉगर मित्रों का ध्यान गया क्या ब्लॉगर्स का पुनर्जन्म होगा ? क्या ब्लॉगर्स मोक्ष के अधिकारी हैं ?

हमारे यहाँ सभी दर्शनों में पुनर्जन्म को माना गया है , सिवाय 'चार्वाक' दर्शन के , जो कहता है की व्यक्ति अपने कर्मों का फल इसी जीवन में भुगत लेता है और उसको मोक्ष मिल जाता है।

यावद जीवेद सुखं जीवेद ,
ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत।

यदि चार्वाक दर्शन को मानें तो एक ब्लॉगर को अपने पाप-कर्मों का फल 'भडासी-टिप्पणियों' के माध्यम से बखूबी मिल जाता है और वह ब्लॉगर जन्म-मृत्यु के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त हो जाता है।

इस आलेख के माध्यम से भडासी-टिप्पणीकारों का आभार अभिव्यक करती हूँ , क्यूंकि उन्हीं के द्वारा दी गयी यातना से मेरे पाप-कर्म कट रहे हैं और मोक्ष प्राप्ति के फलस्वरूप , स्वर्ग में मेरा स्थान सुनिश्चित हो रहा है।

कहते हैं ना की जो होता है , अच्छे के लिए होता है अब देखिये मित्र ब्लॉगर की टिप्पणियां ही उऋण कर रही हैं और मोक्ष दिला रही हैं। सभी भडासी-टिप्पणीकारों से निवदन है की मुझे मेरे पाप कर्मों के लिए यातना देने अवश्य आयें ताकि मेरे रहे-सहे पाप कर्म भी नष्ट होवें और मन निश्चिन्त होकर परलोक गमन करे।

यकीन जानिये ऐसा करके आप भी पुण्य के भागीदार होंगे हम सभी मोक्ष प्राप्त करके स्वर्गलोक में पुनः मिलेंगे।

Zeal

Monday, April 4, 2011

ब्लॉग अनुभव -- भाग -११

एक -

यूँ खफा होकर क्यूँ दूर छुप गए हो ,
संदेसा तो भेजा था - " आशा है आप समझेंगे "
अब बेकार ही कहते हो ...
"हमसे आया गया, तुमसे बुलाया गया"

दो-

उनकी टिप्पणी की भड़ास पर ,
प्रति-टिप्पणी लिखने की प्यास थी बहुत
लेकिन पी गए हम अपनी तलब को ,
नियति समझकर...
आखिर ब्लौगिंग के दस्तूर जो समझ लिए थे हमने...

तीन -

कमबख्त , इतनी देर से क्यूँ आते हो ...
मेरी पोस्ट बदल जाती है ,
तुम टिपण्णी देने से बच जाते हो

चार -

होली गयी , दिवाली आई
टिप्पणीकारों ने,
कॉपी-पेस्ट की दूकान चलाई
त्यौहार गए तो वर्ल्ड कप गया
ब्लोगर्स को भी क्रिकेट का बुखार गया
सब टीवी से चिपके थे , मेरी हालत अजीब हो रही थी ,
अच्छी भली पोस्ट भी , शहीद हो रही थी
नीचे लिविंग रूम से ,
बाप-बेटे की रह-रह कर आवाज़ रही थी .... ....ऊऊऊऊऊऊउ ....
परेशान होकर बिटिया बोली-- Please don't Shouttttttttttttttttttt ...

हमने भी लैपटॉप shut down किया ,
सोचा , आराम बड़ी चीज़ है , चलो सो ही जाते हैं
कल तक तो ब्लोगर्स का बुखार उतर जाएगा
मुरझाती पोस्टों का खुमार लौट आएगा
लेकिन ये क्या ????
बुखार बरकरार था , धोनी को मिले लाखों
और ब्लोगर्स पर खुमार था
जहाँ देखो वहां बधाई के बाज़ार लगा रहे थे ,
हम भी कॉपी -पेस्ट करके करीने से सज़ा रहे थे

पाँच -

गंभीर है मेरी बिमारी , कहते हैं जिसे - "बोरियत"
कुछ करो संजीदगी से , पूछो केवल खैरियत
राधिका बोली -
"दिव्या तुम्हारा अब कुछ नहीं हो सकता ,
अरिष्ट लक्षण साफ़ नज़र रहे हैं
उँगलियों पे गिनो गिनती ,
परलोक के दिन अब करीब रहे हैं "

आभार

Monday, March 14, 2011

इक्यावन बुके , पच्चीस हज़ार टिशू-पेपर के पैकट -stand in queue please !

सब तरफ उत्सव की तैय्यारियाँ दिख रही थीं। फिजा में उल्लास के साथ कसक भी बिखरी हुई थी । बसंत के सुर्ख रंगों में होली के अनंत रंग घुले हुए थे। वातावरण में संगीत की सुन्दर धुन बज रही थी ...

तुम इतना जो मुस्कुरा रही हो ...
क्या गम है जिसको छुपा रही हो ...

हमने एक सतरंगी टोकरे में इक्यावन बुके सजाये हुए थे और एक ट्रक भर के पचीस हज़ार ब्लॉगर्स के लिए टिशू पेपर की व्यवस्था की थी । पंक्तिबद्ध होकर सभी ब्लॉगर अपने-अपने लिए निर्धारित वस्तुएं ग्रहण करते जा रहे थे और मुझे शिष्टाचारवश धन्यवाद भी दे रहे थे । मैं भावुक नयनों से सभी को भीनी-भीनी विदाई दे रही थी।

तभी कोने में बैठी राधिका पर मेरी नज़र पड़ी । रोने के कारण उसकी नाक सुड-सूड़ कर रही थी पूछा "क्या हुआ ?, कुछ लेती क्यूँ नहीं "। उसने कहा - "एक से मेरा क्या होगा "......हमने कहा - "आप दो लीजिये".....बोली- " इतने ब्लॉग लिखे कि सूख कर छुहारा हो गयी , लेकिन मुझे कोई भी ब्लॉगर-सम्मान नहीं मिला" , मेरे दिल के छालों के लिए एक बरनौल मिल जाये तो कुछ राहत आये"

पाठकों से निवेदन है जाते जाते अपने पैकट से मेरे लिए भी एक टिशू पेपर देते जाइए हो तो रुमाल ही दे दीजिये और मेरी सखी राधिका के लिए बरनौल भिजवा दीजियेगा

फिजां में गाने की धुन बदल चुकी थी ...

मुबारक हो सबको समां ये सुहाना ..
मैं तो दीवाना , दीवाना , दीवाना ..
मैं खुश हूँ मेरे आंसुओं पे जाना ..
मैं तो दीवाना , दीवाना , दीवाना ...

.