Showing posts with label Chidambaram. Show all posts
Showing posts with label Chidambaram. Show all posts

Sunday, February 5, 2012

भ्रष्ट सरकार

न तो चिदंबरम ने कोई षड्यंत्र किया है , न ही कसाब ने कोई आतंक, क्योंकि कसाब द्वारा किये गए ३६६ क़त्ल और चिदंबरम के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं। धन्य हैं देश का न्याय और धन्य है ये भ्रष्ट सरकार। मुट्ठी भर बिकाऊ वोटों से जीत कर हम देशवासियों पर पांच वर्ष के लिए थोप दी जाती है। अरे उखाड़ फेंको इस भ्रष्ट सरकार को। फिर न अदालतों की ज़रुरत पड़ेगी न ही साक्ष्यों की। क्योंकि घोटाले बंद हो जायेंगे और रामराज्य स्वतः ही स्थापित हो जाएगा।

Tuesday, December 21, 2010

हर शाख पे दिग्गी बैठा है , अंजामे गुलिस्ताँ जाहिर है -- हिन्दू आतंकवाद

कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी , दिग्विजय सिंह के , ATS chief स्वर्गीय करकरे जी के सन्दर्भ में बयान ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ जंग को गहरी ठेस पहुंचाई है।

माननीय चिदंबरम जी " भगवा-आतंक " द्वारा पहले ही काफी शोहरत बटोर चुके हैं।

राहुल गांधी जब भी अपनी चोंच खोलते हैं तो कुछ न कुछ गजब ढाते ही हैं । इस बार उनका वक्तव्य है - " हिन्दू आतंकवाद , राष्ट्र के लिए ज्यादा बड़ा ख़तरा है। "

अब मिलिए मनीष तिवारी जी से । इनकी बयानबाजियां तो अंतहीन हैं।
  • काश्मीर के हिन्दू पंडितों के विरोध में।
  • अमिताभ बच्चन के विरोध में
  • नरेंद्र मोदी को २००२ में हुए गुजरात दंगों का जिम्मेदार बताया।
  • मोदी की दाऊद से तुलना की ।

अरे इनसे कोई पूछे राजीव गांधी ने सन १९८४ में जो सिख दंगे फैलाए उसका क्या ? जगदीश टाईटलर और सज्जन सिंह क्यूँ नहीं पेश हुए हुए अपेक्स कोर्ट में। क्यूँ छुपते रहे सीबीआई के पीछे । उन्हें कभी बाहर का रास्ता क्यूँ नहीं दिखाया गया। क्या इनमें इतनी हिम्मत थी की मोदी की तरह SIT के सामने स्वयं ही पेश हो जाएँ। साँच को आँच क्या । आज नीर-छीर विभाजन हो चुका है। क्या सज्जन कुमार और दाऊद जैसे लोग खुद को volunteer कर सकेंगे SIT के आगे ? फिर इतनी घृणास्पद तुलना क्यूँ ? क्या कुछ भी बयान दे देना इनका शौक हो गया है ? या फिर आदत ? या फिर पार्टी-पॉलिसी ?

धर्म-निरपेक्षता-

क्या कोंग्रेस वास्तव में धर्म-निर्पेक्ष पार्टी है ? जो लगातार RSS और BJP पर निशाना साधती रहती है और " हिन्दू-आतंकवाद " तथा " भगवा-आतंकवाद" जैसी घृणित शब्दावलियों का प्रयोग करती है। आज कोंग्रेस इसी पुरजोर कोशिश में लगती है की राष्ट्र को साम्प्रदायिकता के नाम पर टुकड़ों में बाँट दिया जाए।

यदि कोंग्रेस खुद को धर्म-निर्पेक्ष समझती है , तो इसके लिए जरूरी है धर्म निर्पेक्षता की परिभाषा को सही परिपेक्ष्य में समझा जाए। धर्म-निरपेक्षता में विश्वास रखने वाले लोग सभी धर्मों को उनकी आस्था एवं विश्वास के साथ जीने देते हैं ना की एक दुसरे पर निरंतर दोषारोपण करते हैं।

राहुल गांधी द्वारा - "हिन्दू आतंकवाद" और चिदंबरम के "भगवा आतंकवाद" तथा दिग्गी की बयानबाजियां क्या सिद्ध करती है ? क्या कोंग्रेस सही मायनों में धर्म-निर्पेक्ष है ? कोंग्रेस का धर्म , देश का विकास करना है अथवा विरोधी पार्टियों को आतंकवादी करार करना है ?

हिन्दू आतंकवाद -

यदि हिन्दू आतंकवाद जैसा कहीं कुछ जन्म ले रहा है तो उसका गर्भ कोंग्रेस में ही है , जो कोंग्रेसी नेताओं की निरर्थक एवं सस्ती बयानबाजियों में परिलक्षित हो रही हैं। समय आगया है की हम पहचानें उन आतंकियों को जो हिन्दू-आतंकवाद और भगवा-आतंकवाद , जैसी शब्दावलियों की आड़ में देशवासियों की श्रद्धा और विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

ड़ाल-ड़ाल कमज़ोर है , पहचानो पक्षी-पक्षी को ..
हर शाख पे दिग्गी बैठा है , अंजामें गुलिस्ताँ जाहिर है ।

आभार ।