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Monday, November 19, 2012

डॉक्टरों का अनैतिक चरित्र

पिछले एक माह से डॉक्टर शर्मा  और उनकी पत्नी मेरे पीछे पड़े थे उनका एमवे (Amway) का प्रोडक्ट खरीदने के लिए ! तीन प्रकार की दवाईयां (मल्टी विटामिन , कैल्शियम  और प्रोटीन पाऊडर) जबरदस्ती बेचना चाहते थे मुझे (कुल बिल सात हज़ार का ) ! हमने संकोचपूर्ण शालीनता से बहुत टाला की नहीं लेना है मुझे , लेकिन डॉक्टर शर्मा और पत्नी अब सेल्स पर्सन बन चुके हैं , शर्म-हया बेच चुके हैं , पीछे पड़  कर अपना प्रोडक्ट बेचते हैं ! आखिर उन्होंने मेरी मेहनत  की कमाई के 2100 रूपए झटक ही लिए , जिसमें उन्होंने मल्टी-विटामिन का एक डिब्बा 120 गोलियों वाला जबरन थमा दिया ! उस पर उन्हें कितना प्रतिशत लाभ हुआ ये वो ही जानें !  अब सोचिये वे अपने हर मरीज़  को कितना मूर्ख बनाते होंगे जब उन्होंने एक स्वस्थ व्यक्ति को भी बेचने में सफल रहे ?

इस प्रकार से हुआ मुनाफ़ा उनकी अतिरिक्त कमाई है !

डाक्टर शर्मा सरकारी अस्पताल में अच्छे ओहदे पर हैं , बंगले  सहित सभी सुविधा मिली हुयी है ! लेकिन जिस समय उन्हें अस्पताल में मरीजों को देखना चाहिए वे प्रॉक्सी मारकर लोगों को एमवे के प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए सहमत करने में अपनी ऊर्जा व्यय करते हैं ! और वहां सरकारी अस्पताल में मरीज तकलीफ में छटपटाते  रहते हैं !

आप लोगों से निवेदन इन विदेशी कंपनियों के बिछाए जाल से दूर रहिये ! स्वदेशी इस्तेमाल करिए और ऐसे पीछे पड़ने वाले चिपकू-चाटू और पकाऊ  लोगों से सावधान रहिये !

डॉक्टरों से निवेदन है, अपनी नैतिकता बरकरार रखिये , जो समय मरीजों के लिए मुक़र्रर है उसे अपने धन-लाभ में मत उपयोग कीजिये ! इंतज़ार कर रहे मरीज़ का भी वक्त उतना ही कीमती  होता है जितना आपका ! इस प्रोफेशन की गरिमा बनाए रखिये और अपनी जिम्मेदारी समझिये !

जब तक हर व्यक्ति का चरित्र ऊंचा नहीं होगा, तब तक देश का विकास असंभव है !
 
जय हिन्द
जय भारत

Zeal

Tuesday, December 13, 2011

इंजीनियर्स की खेती में भारत सबसे आगे

जापान भले ही तकनीक में सबसे आगे हो लेकिन इंजीनियर्स की पैदावार में भारतवर्ष ही अग्रणी है ! प्रतिवर्ष यहाँ लाखों की संख्या में इंजिनीयर्स तैयार होते हैं! सड़क पर चलता हर दूसरा बंदा इंजिनियर ही है!

फैशन के दौर में गारेंटी की उम्मीद ना करें !

जैसे मौसम आने पर बेर की झाड पर 'बेर' लद जाते हैं , वैसे ही मेरे इष्ट, मित्र, नाते रिश्तेदार और पडोसी सभी की संतानों में इंजीनियर्स की नयी खेप आ गयी है ! जो कल तक इंजिनीयर की सही स्पेलिंग भी नहीं जानते थे वे भी आज इंजिनियर बन गए हैं! जिससे भी हाल-चाल पूछो पता चलता है , बिटिया इंजीनियरिंग कर रही है , बेटा final ईयर में है!

खुश होऊं या आश्चर्यचकित? बच्चे आजकल विद्वान् ज्यादा हो रहे हैं अथवा शिक्षा ही कुछ ज़रुरत से ज्यादा सुलभ हो गयी है?

खैर मुझे तो प्रसन्नता से ज्यादा आश्चर्य हुआ इंजिनीयर्स की डिमांड और सप्लाई देखकर! कारण पता किया तो पता चला, हर गली नुक्कड़ पर इंजीनियरिंग कालेज खुल गए हैं! हर किसी को एडमिशन भी मिल रहा है! योग्यता का कोई भी मोहताज नहीं है अब ! चयन प्रक्रिया कुछ भी नहीं है ! दो-लाखवी पोजीशन वाला भी आराम से एडमिशन पा सकता है! अब तो UP सरकार ने एक यूनिवर्सिटी भी खोल रखी है जिसमें प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में 'श्रद्दालू' उर्फ़ इन्जियार्स भर्ती होते हैं ! अब किसी को निराश नहीं किया जाएगा! सर्वे भवन्तु सुखिनः

पहले आरक्षण के कारण डाक्टर और इन्जियर्स की माशाल्लाह खेपें आ रही थीं जो मरीजों और पुलों को डूबा रही थीं ! अब तो 'झरबेरी' के पेड़ पर टँगी है काबिलियत ! तोडिये और टांक दीजिये कहीं पर भी!

अब बात करते हैं IITans की ! हर माता-पिता अपने बच्चे को ' IIT ' में ही सेलेक्टेड देखना चाहता है, ६५ लाख सालाना पॅकेज से ही शुरुवात करना चाहता है! गला-काट कॉम्पिटिशन है , शायद इसीलिए आसमान की चाह में खजूर पर लटके गुच्छे बन जाते हैं सभी !

क्या फायदा है इससे ? नयी पढ़ी की इस नयी खेप को चिकित्सा और अभियांत्रिकी की डिग्री तो मिल जा रही है लेकिन नौकरी के लिए ये मारे-मारे फिर रहे हैं ! ४ से ५ हज़ार रूपए महिना पर नौकरी कर रहे हैं ! कुछ तो सब्जी की दूकान लगा रहे हैं ! depression (अवसाद) के शिकार हो रहे हैं ये बच्चे! frustation बढ़ रहा है इनमें ! १८ से २५ आयुवर्ग में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं !

कृपया उपाय बताएं ! शिक्षा पद्धति में दोष कहाँ है ? क्या इन कालेजों की mushrooming स्वागत योग्य है? क्या ये गली-गली डाक्टर-इंजीनियर्स की खेप निकालने से बेहतर क्वालिटी पर ध्यान नहीं देना चाहिए?

Sunday, January 30, 2011

एक मुलाक़ात - बुढापे के साथ

उम्र बढ़ने के साथ ही बुजुर्गों में बहुत से शारीरिक , मानसिक और क्रियात्मक बदलाव होने लगते हैं तथा शारीरिक क्रियाएं धीमी पड़ने लगती हैंकोशिकाओं का क्षय होने लगता है तथा रोगग्रस्त कोशिकाएं बनने लगती हैंसंरचनात्मक बदलाव होने के कारण कुछ अंग सिकुड़ने लगते हैं तो कहीं prostate जैसे अंग बढ़ने लगते हैंआर्थिक रूप से अशक्त तथा अनियमित भोजन की आदत वालों में भी बुढ़ापे का असर शीघ्र दिखने लगता है

बुढापे की अवस्था में -
  • पेट से स्रावित होने वाले जूसों का स्राव कम हो जाता है तथा आंत्र की गति धीमी हो जाती है
  • वृक्कों ( किडनी ) की क्रियाशीलता धीमी हो जाती है
  • होरमोंस द्वारा संचालित होने वाली क्रियाएं कम हो जाती हैं
  • आँखों की रौशनी कम होने लगती है तथा Cataract (मोतियाबिंद) और Glaucoma जैसी बीमारियाँ होने की संभावना ज्यादा होती हैं
  • व्यक्ति की श्रवण क्षमता कम होने लगती तथा जबान का स्वाद बदल जाता है
  • त्वचा रूखी हो जाती है तथा उस पर झाईं या धब्बे आने लगते हैं
  • चेहरे पर हलके रोयें आने लगते हैं
  • स्वस्थ कोशिकाओं के निरंतर क्षय होने के कारण arthritis , pneumonia , कैंसर , मोटापा आदि रोग हो जाते हैं तथा शारीर में पौष्टिक तत्वों की कमी हो जाती है

  • उच्च रक्तचाप - बढती उम्र के साथ उच्च रक्तचाप ( high BP ) होना एक बड़ी समस्या हैयदि ६० वर्ष केऊपर के व्यक्ति में रक्तचाप १६०/९० से ऊपर हो तो उसे 'hypertension' का मरीज समझियेइसके लक्षण हैं - सरदर्द, जी मितलाना , चक्कर आना , सांस फूलना , पैरों में सूजन , छाती में दर्द होना आदि
    -
  • मोटापा- दुबला होना कोई समस्या नहीं है , लेकिन मोटापा बहुत से रोगों कों निमंत्रण देता हैजैसे - arthritis , उच्च रक्त चाप , मधुमेह ( Diabetes mellitus ) , high cholestrol, पथरी , fungal infectionआदिस्त्रियों की तुलना में , पुरुषों में मोटापा ज्यादा खतरनाक होता है
  • मधुमेह ( Diabetes mellitus )- काम-काज करना , मोटापा, मानसिक तनाव तथा steroids आदि दवाओं के सेवन से मधुमेह होने का ख़तरा रहता हैजिसके कारण कभी कभी अन्धता, किडनी बेकार हो जाना , heart attack , पक्षाघात आदि होने का ख़तरा रहता है
  • Heart attack - यदि ह्रदय कों रुधिर की आपूर्ति कम हो जाती है या फिर रुधिर वाहिकाओं में रक्त के थक्कों के कारण अवरोध होने से दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती हैइसके लक्षण हैं - छाती में तीव्र वेदना होना जो बायीं भुजा तथा कन्धों की तरफ बढती है , बहुत पसीना होना तथा वमन होना
  • पक्षाघात ( paralysis)- कभी कभी रुधिर वाहिनियों से रक्त बहने , थक्का होने अथवा किसी प्रकार का अवरोध होने की स्थिति में मस्तिष्क कों रक्त कम पहुंचता हैऐसी स्थिति में पक्षाघात होता है तथा शरीर का एक हिस्सा कार्य करना बंद कर देता है
  • पेप्टिक अल्सर - वृद्धावस्था में आँतों का mucosal resistance कम हो जाने के कारण तथा एसिडिटी बढ़ने के कारण , पेप्टिक अल्सर होने का खतरा होता है , जिसके कारण तीव्र पेट दर्द तथा रक्त-वमन होने की शिकायत हो जाती है
  • कब्ज़ ( constipation )- व्यायाम करने से , भोजन में फाइबर की कमी से तरल पदार्थों के कम सेवन से कब्ज़ हो जाता है जो आगे चलकर piles नामक रोग पैदा करता है
  • इस उम्र में arthritis, हर्निया , piles , gall bladder stones , प्रोस्टेट का बढ़ जाना ( पुरुषों में ), गर्भाशय में ट्यूमर , osteoporosis , fracture , मूत्र सम्बन्धी विकार आदि , आम समस्याएं हैं
सामान्य चिकित्सा -
  • तरल पदार्थों का खूब सेवन करें
  • भोजन में फाइबर वाले तत्वों कों शामिल करें
  • दिन में कम से कम एक फल और एक गिलास दूध लें
  • नियमित व्यायाम करें ( इससे cholestrol नहीं होगा, रक्त चाप सही रहेगा, शुगर नहीं बढ़ेगी , कब्ज़ नहीं होगा तथा अच्छी नींद आएगी ,
  • सुबह शाम ४० से ६० मिनट तक यथा शक्ति तेज़ चाल से चलें
  • कैल्शियम का उचित सेवन करें
  • नियमित आँख और ENT जांच काराएं ताकि Cataract , Glaucoma तथा impaired hearing से बचा जा सके
  • वर्ष में एक बार पूरी जांच अवश्य करायेंइससे early diagnosis बनती है तथा रोगों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है
कुछ ध्यान देने योग्य बातें -
  • बुजुर्गों के रोग एवं चिकित्सा कों एक अलग शाखा geriatrics में डील करते हैं क्यूंकि इनके रोग , निदान , चिकित्सा तथा सामाजिक समस्याएं थोड़ी भिन्न होती हैं
  • बुजुर्गों का psychological attitude अक्सर चिकित्सक कों सही निदान करने में अवरोध डालता है
  • वे अपनी परेशानियों कों छुपाने का प्रयास करते हैं , जिसके कारण वे स्वयं कों और भी ज्यादा कष्ट देते हैंतथा early diagnosis बनने में देर हो जाती है
  • कभी कभी ऊंचा सुनने की स्थिति में या अवसाद की स्थिति में बुज़ुर्ग ठीक से संवाद नहीं कर पातेऐसी स्थिति में चिकित्सक का व्यवहारिक अनुभव काम आता है
  • बुजुर्गों में दवाओं का side effect ज्यादा होता है , इसलिए बुज़ुर्ग लोग कृपया चिकित्सक की सलाह पर ही दवाएं लें , क्यूंकि side effect , मर्ज से भी ज्यादा घातक हो सकते हैं
  • उचित पौष्टिक भोजन अच्छे स्वास्थ के लिए सबसे जरूरी है

Friday, June 18, 2010

Eleven days !

In 2003, I was doing my internship and i had to travel 12 km daily to reach hospital. I used to go by Vikram-auto [common in Lucknow] in rs five and ten minutes. My hard luck always moved ahead of me and there was indefinite strike by auto drivers . It was a trouble for many of us but i was in serious trouble, waiting at the stop, looking for Rickshaw and bargaining with Rickshaw puller as their rates went irrationally high due to strike.The time to reach hospital and return home increased five folds. The situation was annoying but i had no other option.

At that time I was posted in Pediatrics under Dr. V P Singh. All my mind was focused about standing at Hazratganj square and looking for Rickshaw in the scorching heat of May month.

Around quarter to two, Dr. Hiten [ My fellow Intern ] came in our room, he greeted Dr. Singh, kept his Helmet aside and sat silently as if he was waiting for someone. Senior doctor Singh and I was unable to understand for whom he has come and what he is up to.

Around 1400 hours, when the time was over and Dr. Singh left for his home, I also headed to the gate, cursing the auto-tempo strike. Dr. Hiten softly asked me to follow him . I followed him to the Bike stand. He started his Bike and asked me to sit. I was hesitant, the fear was evident on my face. We were at a very formal terms with each other. He guessed my fear and reluctance . In his graceful voice he said, "Divya , i will pick you and drop you to home till the strike is called off and you don't have to stand in sun , looking for conveyance.". I was speechless and obeyed his command in a mechanical way.

Next morning, when i came out of my house, he was there to pick me up. After a formal exchange of greetings , we were again on road, with hardly any exchange between us.

From hospital to home and home to hospital,it was the most beautiful routine of my life. Along with me, my senior doctor Singh also kept wondering that who is he, what is the relation between two of us and how particular he is in coming to Dr Singh's room and sitting there silently till the clock tells two.

The strike was called off after eleven days and the beautiful routine was broken. But next month we were posted together in Dermatology under Dr.K P Pathak. From eight till two in the noon it was a great experience being with him. He used to discuss diseases and topics and follow up cases with great expertise. I was mesmerized by his knowledge and intellect. He motivated me to purchase Kinetic Honda or a scooty for myself . I paid heed to his advice and purchased 'Sensation scooter' of LML.

On my first day to hospital with my scooter, i was scared of entering the hospital gate , as the area near gate was in a bad shape and a new driver like me was very likely to trip and fall. But to my utter surprise Dr. Hiten was waiting there and saved me from the embarrassment of falling at entrance. Since then it was again a routine for him to park my scooter in the stand in mornings and take it out for me in the noon daily.

He completed his internship and left after five months. I continued for another seven months.

After four years i received an invitation card of his marriage, which i did not attend due to my own busy schedule.

I still wonder who was he? A friend? or an angel in disguise?