ब्रम्हा जी ने जब सिष्टि की रचना की तो उनके सर से ब्रह्मण , भुजाओं से क्षत्रिय , जंघा से वैश्य तथा पैर के तलवों से शुद्र पैदा हुए । इस प्रकार ये चार वर्ण बने। ब्रम्हा जी ने धर्मराज को कार्य सौंपा की तीनों लोकों में जितने भी जीव हैं उनके जन्म-मृत्यु, पाप-पुण्य, मोक्ष आदि का पूरा लेखा जोखा रखो। धर्मराज कुछ समय के बाद परेशान होकर ब्रम्हा के पास गए और बोले- " प्रभु, चौरासी लाख योनियों के जीवों के पाप पुण्य के लेखा-जोखा मुझसे अकेले नहीं होता, मेरी समस्या का समाधान कीजिये। उनकी बात सुन ब्रम्हा जी चिंता में पड़ गए। उनकी इस अवस्था को देख, ब्रम्हा जी की काया से एक पुरुष कलम-दवात लेकर उनके समक्ष प्रकट हुआ। काया से प्रकट होने के कारण उन्हें कायस्थ कहा गया । उनका नाम चित्रगुप्त हुआ। मनु स्मृति के अनुसार ब्रम्हा जी ने चित्रगुप्त महाराज को धर्मराज के साथ यमलोक में पाप-पुण्य कर्मों के अनुसार मोक्ष आदि के निर्धारण का कार्य सौंपा। इसीलिए कायस्थ लोग पारंपरिक तौर पर लेखांकन [ अकाऊंटिंग ], तथा साहित्यिक गतिविधियों से ज्यादा जुड़े हुए होते हैं। कलम के धनी कायस्थ लोग दीपाली के तीसरे दिन कलम-दवात की पूजा करते हैं।
पद्म पुराण तथा भविष्य पुराण के अनुसार , चित्रगुप्त महाराज की दो पत्नियों से बारह संतानें हुई । पहली पत्नी शोभावती / इरावती [ ऋषि शिव शर्मा की पुत्री ] से भटनागर, माथुर, सक्सेना , श्रीवास्तव तथा दूसरी पत्नी माता नंदिनी [ सूर्य पुत्र -आदि मनु की पुत्री ] से अम्बष्ट , अष्ठाना ,निगम , वाल्मीकि, गौड़, कर्ण , कुलश्रेष्ठ , एवं सुरजद्वाज नामक आठ संतानें पैदा हुईं।
कायस्थों की बारह उपजातियां जब भारत के विभिन्न प्रान्तों में फैलने लगे , तो उन्होंने कुछ स्थानीय नाम अपना लिए। जैसे बिहार के कर्ण कायस्थ, आसाम के बरुआ, उड़ीसा के पटनायक और सैकिया , पश्चिम बंगाल के बोस , बासु, मित्रा , घोष, सेन, सान्याल तथा महाराष्ट्र में प्रभु। कुछ लोग लाल, प्रसाद, दयाल तथा नारायण भी लिखने लगे।
आइये मिलते हैं , देश की कुछ गौरवशाली ' कायस्थ ' हस्तियों से --
१- स्वामी विवेकानंद -
- स्वामी विवेकनद speaking on the status of Kayasthas said:
- “I am the descendant of that great man at whose feet every Brahmin bows his head।”
१२ जनवरी 1863 को जन्मे नरेन्द्रनाथ दत्त [ विवेकानंद], रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे । स्वामी विवेकानंद ने विलुप्त होते हिन्दू धर्म को बचाया तथा पश्चिम में भी इसका प्रचार-प्रसार किया। इन्होने वेदान्त, योग तथा विज्ञान को भी उचाईयों तक पहुँचाया।
-१९ सितम्बर १८९३ को शिकागो की धर्म-संसद में अपना पहला अध्यात्मिक भाषण दिया। भाषण की शुरुआत इन्होने " सिस्टर्स एंड ब्रदर्स आफ अमेरिका " से की। इससे प्रभावित होकर वहाँ पर उपस्थित ७००० लोगों की भीड़ ने उन्हें स्टैंडिंग-ओवेशन दिया। न्यू योर्क हेराल्ड ने लिखा-......" Vivekananda is undoubtedly the greatest figure in the parliament of religion. After hearing him we feel how foolish it is to send missionaries to this learned nation . "
-१८९७ में इन्होने 'रामकृष्ण मठ तथा रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। अल्मोड़ा के निकट अद्वैत आश्रम की स्थापना की। इन्होने 'प्रबुद्ध भारत ' [अंग्रजी ] तथा 'उद्बोधन' [बंगाली ] पत्रिकाओं की शुरुआत की ।
-भारत के प्रथम गवर्नर जनरल , चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने लिखा की - " विवेकानंद ने हिंदुत्व तथा राष्ट्र को बचाया "
सुभाष चन्द्र बोस ने कहा की " Vivekananda is the maker of modern India "
गाँधी जी ने कहा-" Vivekananda's writings need no introduction from anybody. They make their own irresistible appeal. "
अरबिंदो घोष ने उन्हें अपना अध्यात्मिक गुरु माना।
रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा- " If you want to know India- Read Vivekananda. "
Nobel Laureate Romain Rolland wrote- " His words are great music , phrases in the style of Beethoven, stirring rhythms like the march of Handel choruses."
बहुत से शैक्षणिक संस्थानों ने विवेकानंदा के नाम को अपनाया -
१-IIT Madras - Vivekananda study circle.
२-IIT Kanpur- Vivekananda Samiti.
११ नवम्बर १९९५ में शिकागो में मिशिगन अवेन्यु नामक सड़क-मार्ग का नाम ' स्वामी विवेकानंदा वे ' रखा गया।
स्वामी विवेकनद के पुण्य-स्मरण में १२ जनवरी , उनके जन्म-दिन पर ' नॅशनल यूथ डे ' मनाते हैं। जो हमारी युवा पीढ़ी को , अपनी प्राचीन संस्कृति को बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।
विवेकनद एक बहुत बड़े कवी तथा गायक भी थे। इन्होने मृत्यु से पूर्व '....काली डा मदर ' को राग-बद्ध किया।
२- डॉ राजेन्द्र प्रसाद -
-भारत के प्रथम राष्ट्रपति का जन्म , बिहार के जिला सीवान में ३ जनवरी १८८४ को हुआ था। इनके पिता नाम महादेव सहाय तथा माता का नाम कमलेश्वरी देवी था।
-ये भारत के एक मात्र ऐसे प्रेसिडेंट थे जो अपनी तनख्वाह का चौथाई हिस्सा , संस्कृत के विद्यार्थियों को दे देते थे।
-विद्या के धनी डॉ राजेन्द्र प्रसाद गोल्ड मेडलिस्ट थे । परीक्षा में कहा जाता था-' अटेम्प्ट ऐनी फाइव '....राजेंद्र प्रसाद सभी प्रश्न हल करके लिख देते थे - " चेक ऐनी फाइव '
- भारत का पहला संविधान १९४८-१९५० , डॉ राजेंद्र प्रसाद ने बनाया था।
-इन्हें भारत के सर्वोच्च पुरस्कार 'भारत-रत्न ' से पुरस्कृत किया गया।
आजादी के बाद , गांधी जी ने राजेन्द्र प्रसाद को प्रधान मंत्री बनाना चाह तो इन्होने अस्वीकार कर दिया और नेहरु को बनाने के लिए कहा। फिर गांधी जी ने इन्हें राष्ट्रपति बनाना चाह तो इन्होने अस्वीकार करते हुए कहा की- " मैं कर्ज में डूबा हुआ हूँ और मैं नहीं चाहता की आजाद भारत का पहला प्रेसिडेंट कर्जदार हो। तब गाँधी जी ने जमुना लाल बजाज को बुलाकर इनको कर्ज-मुक्त कराया और तब ये राष्ट्रपति बने।
नेहरु जी द्वारा प्रस्तुत - ' हिन्दू कोड बिल ' को जब डॉ राजेंद्र प्रसाद के सामने लाया गया तो उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया, काट-छाँटके बाद दुबारा लाया गया तो पुनः आपति जाहिर की, तीसरी बार में जाकर वह बिल पास` हुआ । तब तक उसका दो-तिहाई हिस्सा हटाया जा चूका था। यदि वो बिल उस समय पूरा पास हो जाता तो भारत का नैतिक मूल्य जो आज आजादी के साठ साल बाद गिरा है, वो तभी गिर चुका होता।
उस बिल पर डॉ राजेन्द्र प्रसाद को सख्त आपत्ति थी। उन्होंने लिखा है -- [" Had there been any clause of referendum in the constitution of India, the electorate would have decided the question. "]
यानि, यदि यह संवैधानिक अधिकार जनता के पास होता तो यह बिल कभी पास नहीं होता।
३- लाल बहादुर शास्त्री -
-भारत के दुसरे प्रधानमंत्री , लाल बहादुर शाष्त्री का जन्म , मुगलसराय -वाराणसी में हुआ। इनके पिता का नाम श्री शारदा श्रीवास्तव तथा माता का नाम रामदुलारी था।
- इन्हें पढ़ाई से बहुत लगाव था, किन्तु बहुत गरीब होने के कारण , नदी तैरकर पार करते थे तथा विद्यालय जाते थे।
- इनहें जाती व्यवस्था से बहुत चिढ थी , इसलिए इन्होने अपने नाम से श्रीवास्तव हटाकर 'शास्त्री ' रख लिया।
- इन्होने हरिजनों के उत्थान के लिए बहुत कार्य किये।
- इनकी मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में ताश्केंटमें, १० जनवरी १९६६ में हुई।
- इन्हें मृत्युपरांत, भारत रत्न पुरूस्कार भी मिला।
४- लोकनायक जय प्रकाश नारायण--
-इस स्वतंत्रता सेनानी का जन्म बिहार के छपरा जिले में , ११ अक्टूबर १९०२ को हुआ।
-मृत्युपरांत इनहें भारत रत्न से पुरस्कृत किया गया।
-इसके अतिरिक्त इनहें मग्सेसे पुरस्कार भी मिला।
-पटना में इनके नाम पर जय प्रकाश नारायण एअरपोर्ट भी है।
- इन्होने 'सर्वोदय आन्दोलन' में अपनी सारी सम्पति दान कर दी तथा हरिजनों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
-इन्होने विनम्रता से राष्ट्रपति पद का आफ़र ठुकरा दिया था।
५-जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा-
-बेहद इमानदार और निर्भीक व्यक्तित्व के थे।
-इलाहाबाद हाई-कोर्ट में १२ जून १९७५ को अपने एक फैसले में इन्होने , इंदिरा गाँधी के गलत तरीके से चुनाव प्रसार करने के कारण , उन पर छेह वर्ष का प्रतिबन्ध लगा दिया था, तथा प्रधान मंत्री को पंद्रह दिन की जेल करा दी थी। इंदिरा गांधी ने प्रतिशोध के चलते २५ जून १९७५ से लेकर १९७७ तक आपातकाल घोषित कर दिया था। लेकिन उसके बाद चुनाव होने पर इंदिरा गांधी की दाल नहीं गली और वे चुनाव हार गयीं।
६- डॉ सम्पूर्णानन्द -
-१ जनवरी को बनारस में जन्मे डॉ सम्पूर्णानन्द को संस्कृत तथा फलित ज्योतिष में बहुत रूचि थी।
-उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री तथा राजस्थान के गवर्नर रह चुके डॉ सम्पूर्णानन्द ने बनारस में संस्कृत विश्विद्यालय की स्थापना की।
-उनका मानना था की कैदियों को रिफार्म किया जाना चाहिए । इसके लिए १९६३ में राजस्थान की सरकार ने ' सम्पूर्णानन्द खुलाबंदी शिविर ' [ओपन जेल ] की शुरुआत की।
७-नेताजी सुभाष चन्द्र बोस-The forgotten hero.
-जन्म-२३ जुलाई १८९७।
-' तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा '- उनका नारा था।
- पूर्ण स्वराज उनका ध्येय था ।
-प्रतिभाशाली सुभाष चन्द्र बोस ने आई सी एस की परीक्षा में टॉप कर अच्छी नौकरी हासिल की, लेकिन देश की खातिर , विदेशियों के अधीन नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया।
- ६ जुलाई १९४४ में सिंगापोर से जब उनका भाषण प्रसारित हुआ तो उन्होंने ही बापू को पहली बार " फादर ऑफ़ था नेशन ' कहा।
-इनके प्रसिद्ध कोट हैं - 'दिल्ली चलो' , ' ऑन टू डेल्ही ' , 'जय-हिंद' तथा 'ग्लोरी ऑफ़ इंडिया '
- जय-हिंद नारे को भारत सरकार तथा आर्मी ने अपना लिया।
-इन्होने आजाद हिंद फ़ौज की स्थापना की तथा इनकी कुर्सी रेड फोर्ट में रखी है जो आज हमारी सांस्कृतिक धरोहर है।
८- हरिवंश राय बच्चन -
-रानीगंज, प्रतापगढ़ , उत्तर प्रदेश में जन्मे हरिवंश राय बच्चन के पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव तथा माता का नाम सरस्वती देवी था।
- ये कम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के दुसरे भारतीय थे जिन्हें , अंग्रेजी में डाक्ट्रेटकी उपाधि मिली।
- इनहें -
-साहित्य अकादमी पुरस्कार [१९६९]
-पद्म भूषण [१९७६]
-सरस्वती सम्मान
-यश भारती सम्मान
-सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार
-लोटस अवार्ड फॉर अफरो एशियन राईटर्स , आदि मिले।
- इनकी प्रचलित कविता ' अग्निपथ ' के अंश--
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हो घने, हो बड़े, एक पत्र-छॉंह भी मॉंग मत, मॉंग मत, मॉंग मत! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! तू न थकेगा कभी! तू न थमेगा कभी! तू न मुड़ेगा कभी! कर शपथ! कर शपथ! कर शपथ! ये महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत् रक्त से, लथ पथ, लथ पथ, लथ पथ ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ!
९-महर्षि शिव ब्रत लाल वर्मा -
इनका जन्म १८०७ में उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में हुआ था। इन्होने अपने जीवन काल में हिंदी, अंग्रेजी तथा उर्दू में ५००० से अधिक पुस्तकें इतिहास , धर्म तथा अध्यात्म पर लिखीं । इन्हें आधुनिक महर्षि वेद व्यास के नाम से भी जाना जाता है। इन्होने १९०७ में 'साधू' नामक पत्रिका शुरू की जो बहुत लोकप्रिय रही। सन १९३९ में इस महान हस्ती का निधन हो गया। इनकी कुछ प्रचलित पुस्तकें इस प्रकार हैं --
- 1) Light of Anand Yoga (English)
- 2) Dayal Yoga
- 3) Shabd Yoga
- 4) Radhaswami Yog: Part 1-6
- 5) Radhaswami Mat Parkash
- 6) Adbhut Upasana Yog: Part 1-2
- 7) Anmol Vichar
- 8) Dus Avtaron Ki Katha
- 9) Kabir Prichaya Adyagyan
- 10) Kabir Yog: Part 1-13
- 11) Kabir Bijak: Part 1-3
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कुछ महान कायस्थ हस्तियां जिन पर हमें गर्व है :
स्वामी विवेकानंद
सर अरबिंदो
महर्षि महर्षि महेश योगी
प्रभुपाद
डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद
लाल बहादुर शास्त्री
सुभाष चन्द्र बॉस
जय प्रकाश नारायण
जस्टिस सिन्हा
बाला साहब ठाकरे
हरिवंश राय बच्चन
मुंशी प्रेमचन्द्र
महादेवी वर्मा
फिराक गोरखपुरी
डाक्टर सम्पूर्णानंद
डाक्टर शांति स्वरुप भटनागर
डाक्टर जगदीश चन्द्र बॉस
भगवती चरण वर्मा
धर्मवीर भारती
फणीश्वर नाथ रेणू
मन्ना डे
मुकेश (गायक)
गणेश शंकर विद्यार्थी
बिपिन चन्द्र पाल
सुभाष चन्द्र बोस
खुदीराम बोस
आदि ...
तो आज हमारा परिचय महाराज चित्रगुप्त की कुछ होनहार संतानों से हुआ।
आभार।
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