गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी जनता अब जागरूक हो गयी है। शायद कुछ ज्यादा ही जागरूक हो गयी है। जिसे देखो वही अपनी पार्टी बनाना चाहता है। अन्ना और केजरीवाल की महत्वाकांक्षाओं का बुखार अब केशूभाई पटेल पर भी छा गया है। मोदी के विरोध में लोग राजनैतिक पार्टियाँ बना कर मनभावन सपने देखने में लगे हुए हैं। लेकिन किसके हाथ में नेतृत्व सौंपना है वो अभी भी जनता के ही हाथ में है। चलिए देखते हैं भारत भूमि का भविष्य क्या है। इस राजनैतिक उथल-पुथल का परिणाम क्या होगा।
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