Showing posts with label cognitive bias.. Show all posts
Showing posts with label cognitive bias.. Show all posts

Sunday, December 12, 2010

पूर्वाग्रह - एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण -- Cognitive biases.

हम सभी कहीं कहीं पूर्वाग्रहों से ग्रस्त होते हैं, लेकिन शायद ही कोई स्वयं को पूर्वाग्रहों से ग्रस्त मानना चाहता होकिसी को अपनी जाति का बायस है, किसी को रंग-रूप का, किसी को शिक्षा का तो किसी को अपनी उम्र से जुड़े तजुर्बों का पूर्वाग्रह हैलेकिन है जरूर कुछ कुछ पूर्वाग्रह सभी कोजब हम कोई भी कार्य पूर्वाग्रहों से ग्रसित होकर करते हैं तो हम अपनी वास्तविक क्षमता का १००% वहां नहीं दे पाते हैंकार्यों की ख़ूबसूरती बाधित होती है तथा विषय के साथ न्याय नहीं हो पाता है

कभी-कभी ये बायस पोसिटिव भी होते हैं तथा त्वरित निर्णय लेने में सहायक होते हैंलेकिन अधिकांशतः यह मस्तिष्क की विकृत कार्य प्रणाली के फलस्वरूप उत्पन्न होते हैं , जो गलत तरीके से इस्तेमाल होते हैं तथा कु-तर्क का रूप धारण करते हैंकोगनिटिव बायस हमसे गलत निर्णय करवाता है तथा इन पूर्वाग्रहों से बचना अक्सर दुश्वार होता हैये पूर्वाग्रह , बीतते समय के साथ, व्यक्ति के व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाते हैंजो हटाये नहीं हटते और छुडाये नहीं छूटतेसबसे अफ़सोस की बात तो यह है की व्यक्ति को ये पता ही नहीं होता की वो पूर्वाग्रहों से ग्रसित हो चुका है

अनेकानेक तरह के पूर्वाग्रह , व्यक्ति की पुख्ता धारणाएं बना देते हैं , जो जरूरी निर्णयों, शोध कार्यों तथा चर्चाओं में अपना प्रभाव दिखाते हैंइनके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं

  • कई बार निर्णय लेते समय , किसी विशिष्ट सूचना पर ही पूरी तरह निर्भर करते हैं।
  • जो ज्यादातर लोग कर रहे हैं , उसीका अनुसरण करना , ये सोचकर की यही उचित होगा क्योंकि एक बड़ा समुदाय ऐसा कर रहा है । [ भेड़चाल मानसिकता ]
  • पूर्वाग्रहों से ग्रसित व्यक्ति खुद को कभी बायस्ड नहीं समझता , बल्कि दूसरों को पूर्वाग्रही समझता है।
  • पूर्वाग्रही अक्सर ऐसी सूचनाओं और आंकड़ों को इकट्ठा करते हैं जो उनकी पूर्वाग्रहों से ग्रसित सोच को बल देते हैं। जिससे उनका पूर्वाग्रह , समय के साथ और भी ज्यादा पुख्ता होता जाता है।
  • पूर्वाग्रही ऐसे सभी तर्कों को खारिज कर देता है जो उनकी धारणाओं के विपरीत होता है। वो स्वयं को सबसे अधिक सही मानता है तथा स्वयं को सर्वोपरि देखना पसंद करता है।
  • ये किसी भी विषय पर एक पहलू से इतना ज्यादा प्रभावित रहते हैं की विषय के अन्य दुसरे पक्षों पर विचार करना जरूरी नहीं समझते। इससे इनके निर्णय दोषपूर्ण हो जाते हैं तथा इनके कार्यों में कोई productive result नहीं आता।
  • बहुत बार किसी सूचना विशेष से इतना ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं की उम्र भर उसी से चिपके रहते हैं तथा अनावश्यक रूप से उन्हीं सूचनाओं के आधार पर हमेशा गलत निर्णय लेकर स्वयं तथा दूसरों के लिए परेशानी का सबब बनते हैं।
  • भिन्न पूर्वाग्रहों के चलते ये मीडिया रिपोर्ट्स को भी पूर्वाग्रहों से ग्रसित मान लेते हैं।
  • पूर्वाग्रहों के आधार पर ये किसी व्यक्ति को उसकी क्षमता से अधिक आंक लेते हैं या फिर उसे कुछ समझते ही नहीं चाहे वो कितना ही प्रतिभाशाली क्यूँ न हो।
  • इन्हें कोई कितनी भी अच्छी राय दे अथवा तर्कों द्वारा समझाए , लेकिन पूर्वाग्रही व्यक्ति कुछ समझने के लिए तैयार नहीं होते हैं। क्यूंकि ये अपनी बनायी धारणाओं के साथ ही जीना चाहते हैं तथा समय के साथ थोड़े जिद्दी हो जाते हैं।
  • कई बार तो ये दूसरों का रिकॉर्ड ट्रेस करने में इतना लग जाते हैं की इनके पूर्वाग्रह अपनी पराकाष्ठा को छूने लगते हैं , ऐसी स्थिति में ये ला-इलाज हो जाते हैं।
  • पूर्वाग्रही व्यक्ति अकसर आस-पास घट रही नकारात्मक घटनाओं को ज्यादा महत्त्व देते हैं , बजाये इसके की आस पास हो रही सार्थक एवं सकारात्मक घटनाओं से ऊर्जा ली जाए।
  • पूर्वाग्रही व्यक्ति , निर्णय लेते समय किसी भी प्रकार की संभावनाओं को पूरी तरह से नकार देते हैं । यदि कोई घटना या disaster , पूर्व में नहीं घटा है , तो ये उस विषय पर सोचने या प्लान करने से इनकार कर देते हैं।
  • इनकी विशफुल थिंकिंग होती है जिसके द्वारा ये मन को अच्छी लगने वाली धारणाओं के अनुरूप ही निर्णय लेते हैं। इन्हें logic या rationality से कोई सरोकार नहीं होता।
  • एक बड़े खतरे में बड़ी न्यूनता लाने के बजाये ये छोटे-छोटे खतरों को शून्य पर लाकर अपने " zero risk bias " को संतुष्ट करते हैं।
  • ये पूर्व की घटनाओं [past] से इतना prejudiced होते हैं की अक्सर ये कहते मिलेंगे -- " I knew it all along "। ये लोग ये सिद्ध करना चाहते हैं की इन्हें सब कुछ पता होता है।

पूर्वाग्रही अक्सर पिटी-पिटाई लीक पर चलते हैं , नया नहीं ग्रहण करना चाहते , जिससे स्मृति विकृत होती है तथा misconception अपनी जडें गहरी करता हैये इनकी मानसिकता को बीमार करके इन्हें कुछ भी सकारात्मक करने से रोकती है

पूर्वाग्रही व्यक्ति की सोच का दायरा बहुत सीमित होता है तथा अक्सर ये समाज के लिए अनुपयोगी होते हैंऐसे व्यक्ति का फोकस विषय पर केन्द्रित होकर व्यक्ति पर ज्यादा केन्द्रित होता हैये अपनी सकारात्मक ऊर्जा को विषय पर लगाने के बजाये व्यक्ति विशेष पर ही व्यय कर देते हैं

पूर्वाग्रहों से ग्रसित व्यक्ति , शीघ्र ही अपने मित्रों तथा शुभचिंतकों को खो देते हैं

आभार