Monday, December 10, 2012
नाम की महिमा
जब
भी कोई बड़ा काम कीजिये , 'स्तरीय' कीजिये ! श्रीमान रघु जी की तरह
'ROADIES' (सड़कछाप) बनने और युवाओं को गाली गलौच सिखाने का कोई औचित्य
नहीं है! आमिर खान की 'THREE IDIOTS' जैसी फिल्मों में सस्ता मनोरंजन
तो है लेकिन वो युवाओं को दिग्भ्रमित भी करता है ! शिक्षकों का कैसे मखौल
उडाना है , यह ऐसी फिल्मों से भली-भाँती सीखा जा सकता है! व्यक्ति को अपने
हर शब्द के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए ! हमारे द्वारा आज की तारीख में
लिखा हर शब्द कल का इतिहास होगा ! अतः हर शब्द गरिमामयी हो , अर्थपूर्ण हो
और प्रेरणादायी हो, चाहे वो किसी संस्था का नाम हो अथवा आपके ब्लौग का नाम
, अथवा आपकी संतानों का नाम !--नाम की महिमा बहुत है ! --जय हिन्द! वन्दे
मातरम् !
Zeal
Sunday, December 9, 2012
फिर से कोई नेहरू और कोई मोहम्मद अली जिन्नाह पैदा हो जाएगा..
If wealth is lost, nothing is lost
If Health is lost, something is lost
If Character is lost , Everything is LOST.
हमारे देश के नेताओं ने तो अपना चरित्र ही खो दिया है ! FDI के मुद्दे पर जिस तरह से मत विभाजन हुआ है , सिर्फ अपने स्वार्थ को देखा है उन्होंने ! किसान, खुदरा व्यापारी और आम जनता के हितों का ध्यान कतई नहीं रखा गया ! सिर्फ अपनी-अपनी कुर्सी बचाने के लिए सस्ती-गणित की गयी है ! विदेशी आकर हमें लूट भी लें तो भी , गुलाम भी बना लें तो भी इन राजनेताओं पर क्या फरक पडेगा भला? आत्महत्या तो किसान करेंगे ! मरेगी और भुगतेगी तो आम जनता ही , इनका क्या जाएगा ! फिर से कोई नेहरू और कोई मोहम्मद अली जिन्नाह पैदा हो जाएगा!
Zeal
If Health is lost, something is lost
If Character is lost , Everything is LOST.
हमारे देश के नेताओं ने तो अपना चरित्र ही खो दिया है ! FDI के मुद्दे पर जिस तरह से मत विभाजन हुआ है , सिर्फ अपने स्वार्थ को देखा है उन्होंने ! किसान, खुदरा व्यापारी और आम जनता के हितों का ध्यान कतई नहीं रखा गया ! सिर्फ अपनी-अपनी कुर्सी बचाने के लिए सस्ती-गणित की गयी है ! विदेशी आकर हमें लूट भी लें तो भी , गुलाम भी बना लें तो भी इन राजनेताओं पर क्या फरक पडेगा भला? आत्महत्या तो किसान करेंगे ! मरेगी और भुगतेगी तो आम जनता ही , इनका क्या जाएगा ! फिर से कोई नेहरू और कोई मोहम्मद अली जिन्नाह पैदा हो जाएगा!
Zeal
Thursday, December 6, 2012
Wednesday, December 5, 2012
फेसबुकिये लिखें तो पाप?
मणिशंकर अय्यर यदि विरोधी पार्टी के सदस्यों को ---"जानवर"--- कह दें तो
सरकार एक फॉर्मल माफ़ी मांग के छुट्टी पा जाती है, लेकिन फेसबुक पर यदि कोई
कुछ लिख दे तो गिरफ्तारी , जुर्माना और तीन साल की सज़ा मिलती है। अय्यर
जैसे राजनेता , जिन्हें बेस्ट सांसद का अवार्ड मिल चुका है वे जपने
विशेषाधिकारों का हनन करते हैं , साथ ही इनकी पार्टी हमारी "अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता" का भी हनन करती है। आप कहें तो पुण्य और फेसबुकिये लिखें तो
पाप? गजब है आपकी दोहरी मानसिकता!
वैसे अय्यर टाइप का एक पुरुष
ब्लॉगर भी है जो खुद को हीरो-बाघ कहता है , साथी पुरुष ब्लॉगर्स को "चमड़ोधा कुत्ता" और महिला ब्लॉगर्स को "लोमड़ी" कहता है! ऐसे गाली-गलौच करने वाले राजनेता और ब्लॉगर्स की क्या सज़ा होनी चाहिए ?
Monday, December 3, 2012
डॉ राजेन्द्र प्रसाद पर गर्व करता है सारा हिन्दुस्तान
डॉ राजेन्द्र प्रसाद -
-भारत के प्रथम राष्ट्रपति का जन्म , बिहार के जिला सीवान में ३ दिसंबर १८८४ को हुआ था। इनके पिता नाम महादेव सहाय तथा माता का नाम कमलेश्वरी देवी था।
-ये भारत के एक मात्र ऐसे प्रेसिडेंट थे जो अपनी तनख्वाह का चौथाई हिस्सा , संस्कृत के विद्यार्थियों को दे देते थे।
-विद्या के धनी डॉ राजेन्द्र प्रसाद
गोल्ड मेडलिस्ट थे । परीक्षा में कहा जाता था-' अटेम्प्ट ऐनी फाइव
'....राजेंद्र प्रसाद सभी प्रश्न हल करके लिख देते थे - " चेक ऐनी फाइव '
- भारत का पहला संविधान १९४८-१९५० , डॉ राजेंद्र प्रसाद ने बनाया था।
-इन्हें भारत के सर्वोच्च पुरस्कार 'भारत-रत्न ' से पुरस्कृत किया गया।
आजादी के बाद , गांधी जी ने
राजेन्द्र प्रसाद को प्रधान मंत्री बनाना चाह तो इन्होने अस्वीकार कर दिया
और नेहरु को बनाने के लिए कहा। फिर गांधी जी ने इन्हें राष्ट्रपति बनाना
चाह तो इन्होने अस्वीकार करते हुए कहा की- " मैं कर्ज में डूबा हुआ हूँ और
मैं नहीं चाहता की आजाद भारत का पहला प्रेसिडेंट कर्जदार हो। तब गाँधी जी
ने जमुना लाल बजाज को बुलाकर इनको कर्ज-मुक्त कराया और तब ये राष्ट्रपति
बने।
नेहरु जी द्वारा प्रस्तुत - ' हिन्दू कोड बिल ' को जब डॉ राजेंद्र प्रसाद के सामने लाया गया तो उन्होंने उसे
अस्वीकार कर दिया, काट-छाँटके बाद दुबारा लाया गया तो पुनः आपति जाहिर की,
तीसरी बार में जाकर वह बिल पास` हुआ । तब तक उसका दो-तिहाई हिस्सा हटाया
जा चूका था। यदि वो बिल उस समय पूरा पास हो जाता तो भारत का नैतिक मूल्य
जो आज आजादी के साठ साल बाद गिरा है, वो तभी गिर चुका होता।
उस बिल पर डॉ राजेन्द्र प्रसाद को
सख्त आपत्ति थी। उन्होंने लिखा है -- [" Had there been any clause of
referendum in the constitution of India, the electorate would have
decided the question. "]
यानि, यदि यह संवैधानिक अधिकार जनता के पास होता तो यह बिल कभी पास नहीं होता।
भोपाल त्रासदी (MIC)
आज के दिन 3 दिसंबर 1984 को देश की सबसे बड़ी
त्रासदी जिसमें भोपाल में गैस (MIC) त्रासदी में तकरीबन 25 हज़ार मौतें हुयीं। भोपाल में उस
त्रासदी का आरोपी वारेन एंडरसन फरार है क्यों सरकार ने फिरंगियों से
रिश्वत जो खायी है ! नहीं पकड़ेगी उसे ! नहीं मिलेगा न्याय मरने वालों को
और उनके बचे-खुचे व्याधिग्रस्त परिवार जनों को! आज भी भोपाल में उस
त्रासदी से प्रभावित लोगों की संतानें विकलांग पैदा हो रही हैं , लेकिन
सरकार इन सब बातों से बेपरवाह है !
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