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Sunday, December 9, 2012

फिर से कोई नेहरू और कोई मोहम्मद अली जिन्नाह पैदा हो जाएगा..

If wealth is lost, nothing is lost
If Health is lost, something is lost
If Character is lost , Everything is LOST.


हमारे देश के नेताओं ने तो अपना चरित्र ही खो दिया है ! FDI के मुद्दे पर जिस तरह से मत विभाजन हुआ है , सिर्फ अपने स्वार्थ को देखा है उन्होंने ! किसान, खुदरा व्यापारी और आम जनता के हितों का ध्यान कतई नहीं रखा गया ! सिर्फ अपनी-अपनी कुर्सी बचाने के लिए सस्ती-गणित की गयी है ! विदेशी आकर हमें लूट भी लें तो भी , गुलाम भी बना लें तो भी इन राजनेताओं पर क्या फरक पडेगा भला? आत्महत्या तो किसान करेंगे ! मरेगी और भुगतेगी तो आम जनता ही , इनका क्या जाएगा ! फिर से कोई नेहरू और कोई मोहम्मद अली
जिन्नाह पैदा हो जाएगा!

Zeal

Thursday, December 6, 2012

रंगे सियार ..


आखिर दोनों रंगे सियारों ने कल संसद में अपनी जात दिखा ही दी !

जय हिन्द !


Wednesday, March 7, 2012

देश का दुर्भाग्य...

भारत देश का ये दुर्भाग्य है की यहाँ की राजनीतिक पार्टियाँ सिर्फ अपने बारे में सोचती हैं। देश के बारे में सोचना उन्हें गुनाह लगता है। सपा और बसपा जैसे दल के नेताओं के पास इतनी बुद्धि ही नहीं है की वे राष्ट्र हित में सोच भी सकें। इनको तो ये भी नहीं पाता की जश्न कभी बन्दूक की गोलियों से नहीं मानना चाहिए। उस मासूम का गुनाह क्या था जिसकी मौत हो गयी। पत्रकारों की पिटाई क्यों की गयी। इतनी जल्दी यादव जी की पार्टी अपनी गुंडागर्दी दिखाएगी , ये मालूम न था। उत्तर प्रदेश की जनता ने कांग्रेस का बहिष्कार करके एक और अच्छा तो किया लेकिन गवारों के इस दल को जिताकर भारी भूल की है।

बीजेपी चाहती तो आसानी से इस समस्या का हल निकल सकता था। उन्हें अपने प्रधानमंत्री(मोदी) और उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री (सुश्री उमा भारती) का नाम स्पष्ट रूप से घोषित करना चाहिए था। गोल-मोल रखने से , ईर्ष्या द्वेष , आपसी फूट और षड्यंत्र की बू आती है। जब तक एक जुट नहीं होंगे तब तक गुंडा राज झेलना ही पड़ेगा। देश का धन निठाल्ले उड़ायेंगे और बाकि अपने स्विस खातों में जमा करते रहेंगे।