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Thursday, December 23, 2010

राजधानी दिल्ली -- बलात्कारी दिल्ली

बड़े ही शर्म की बात है की जिस देश की राष्ट्रपति महिला हैंUPA की अध्यक्ष भी महिला हैं और दिल्ली की मुख्य मंत्री भी महिला हैं, वहाँ भी बच्चियां और महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और दिनों दिन बलात्कार की घटनाएं आम हो रही हैं

सुना था दिल्ली पठन-पाठन में अग्रणी हैयहाँ रोजगार के अवसर भी बहुत हैंलेकिन अब तो हमारी दिल्ली -
  • क्राइम में
  • व्यापारियों को लूटने में
  • इमारतों के ढ़हने में
  • सड़क दुर्घटनाओं में
  • ब्लू-लाइन से कुचलने में और
  • बलात्कार जैसी घटनाओं में अग्रणी है
आखिर वजह क्या है ? ये घटनाएं दिल्ली में ज्यादा क्यूँ हैं ? क्या इसके लिए -
  • दिल्ली की लडकियां जिम्मेदार हैं
  • या दिल्ली का पुरुष वर्ग कुछ भिन्न मानसिकता रखता है
  • या फिर सामाजिक ढाँचे में कहीं कोई कमी है
  • या फिर कमज़ोर सुरक्षा व्यवस्था
  • या फिर झोल-झाल कानूनी प्रक्रिया और व्यवस्था
  • या फिर अशक्त और असंवेदनशील राजनैतिक व्यवस्था
आखिर इसका कोई तो हल होगाकिसी को दोष देकर तो इस समस्या से जूझा नहीं जा सकताबहुत सोचने पर मुझे लगता है यदि निम्न उपायों को अपनाया जाए तो कुछ मदद मिल सकती है , इन बढती हुई घटनाओं से निपटने की


Self defense -

  • लड़कियों को Self defense अपनाना होगा। उन्हें स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी सुरक्षा कैसे करनी है , इसकी physical training लेनी चाहिए।
  • अपने साथ pepper-spray [ मिर्ची पाउडर ] रखें , तथा बलात्कारी और छेड-छाड़ करने वालों से आपातकाल में निपटें ।
  • कोई भी दुर्घटना हो उसकी FIR अवश्य दर्ज करायें । इससे बेसिक- पुलिसिंग में मदद मिलती है ।
  • कोई भी व्यक्ति जन्मजात बलात्कारी नहीं होता। उसमें कुछ क्रिमिनल जींस होते हैं जो धीरे-धीरे विकसित होते हैं , यदि हर छोटे बड़े गुनाह की रिपोर्टिंग होगी तो बड़े गुनाहों को होने से रोका जा सकता है।
  • लडकियां अकेले ना निकलें , एक ग्रुप बनाएं , और यदि कोई दुर्घटना होती है तो मिलकर रिपोर्ट करें तथा थोड़े थोड़े समय पर follow- up के लिए जाएँ तथा त्वरित कारवाई के लिए pressurize करें।
सुरक्षा व्यवस्था -
  • चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा होना चाहिए ताकि मनचलों की हिम्मत ही न पड़े गुनाह करने की।
  • पुलिस वालों का संवेदनशील रवैय्या होना चाहिए अपनी बहन बेटियों के लिए।
  • रिपोर्ट लिखने में तथा कार्यवाई करने में तत्परता दिखायें तथा यथा संभव पूरा सहयोग दें जिससे महिलाएं ऐसी घटनाओं को पुलिस में रिपोर्ट करने में हिचकें नहीं तथा अपराधी खुले ना घूमें।
GPS [ Global positioning system] व्यवस्था -

BPO में काम करने वाली लड़कियों को रात्री में जिस Cab से जाना होता है , उसमें GPS व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कम से कम गाडी किस दिशा में ले जाई गयी है ये पता लगाया सकता हैतथा समय से मदद के लिए पहुंचा जा सकता है

कानूनी व्यवस्था-

  • कानून में बलात्कार जैसी शर्मनाक घटनाओं के लिए सख्त सजा होनी चाहिए
  • त्वरित कारवाई करके अपराधी को शीघ्र ही सजा दिलानी चाहिए। [ Justice delayed is justice denied]
  • ऐसी दुर्घटनाओं में Victim बहुत भयग्रस्त हो जाती है , तथा उसपर मानसिक दबाव भी बढ़ जाता है । मनोबल टूट जाता है । इसलिए कानूनी प्रक्रिया त्वरित तथा सहज होनी चाहिए जिससे पीडिता को बार-बार तिरस्कृत न होना पड़े।
  • त्वरित एवं सख्त कार्यवाई अपराधी की संख्या भी कम करेगी तथा फलस्वरूप ज्यादा केसेज़ रिपोर्ट होंगे और इस समस्या का निदान हो सकेगा।
राजनैतिक व्यवस्था-

  • जो सत्ता में है , जिसके पास ताकत है , वो चाहे तो , सब -कुछ कर सकता है। [ Where there is will , there is a way ]
  • शीला जी का ये वक्तव्य की - " आप बताइये हम क्या कर सकते हैं " ---अत्यंत शर्मनाक है । यदि वो कुछ नहीं कर सकतीं तो अपनीं कुर्सी ही छोड़ दें ।
  • पहले बिहार की बुरी स्थिति थी , आज नितिश जी के सद्प्रयासों से लडकियां सुरक्षित महसूस कर रही हैं । साइकिलों पर बैठकर स्कूल जा रही है। यदि कोई सही मायनों में विकास चाहे तो बिकुल किया जा सकता है।
नया साल रहा हैऐसे में विकृत मानसिकता वाले असामाजिक तत्व ज्यादा active हो जाते हैंइसलिए लड़कियों /स्त्रियों को चाहिए की सजग हो जाएँ

आभार

Friday, September 24, 2010

दिव्या और शेरा ---- जियो-उठो-बढ़ो-जीतो ---- Commonwealth Games.

आज हमारे लिए ये हर्ष का विषय है की , विश्व का १९ वां कॉमन वेल्थ गेम्स हमारे देश में हो रहा है। इस खेल के आयोजन के लिए दो बड़ी बोलियाँ लगी थीं -- कनाडा और भारत से। ४६ मतों के अंतर से आखिर ये सुनहरा मौका हमारे हाथ आ ही गया।

१९५१ तथा १९८२ के एशियन गेम्स के बाद ये ये सबसे बड़ा खेल आयोजन है हमारे देश में , जो हमारे गौरवशाली इतिहास में एक और सुन्दर और गौरवान्वित करने वाला अध्याय जोड़ेगा।

तारीख-- ३ अक्टूबर से १४ अक्टूबर २०१०
स्थान--जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम , नई दिल्ली ।
प्रतीक-- शेर [शेरा]
मोटो [स्लोगन]--" कम आउट एंड प्ले "
प्रतिभागी देश-- ८४ [अब ७२ हैं ]
आयोजित खेल --१७ विभिन्न खेलों के २६० क्रम

ये तो त्योहारों का मौसम होगा। ३ से १४ अक्टूबर तक , हर रोज़, दिवाली मनायेंगे हम। ओस्कर अवार्ड विजेता --ऐ आर रहमान द्वारा निर्देशित , [ उठो-जियो-बढ़ो-जीतो] गाना हर दिशा में गुंजायमान होगा।

क्वीन बैटन रिले-- इस खेल की बेटन मशाल, २९ अक्टूबर २००९ को बकिंघम palace से चली , जो ५४ देशों तथा भारत के हर प्रांत का भ्रमण करते हुए , ३ अक्टूबर २०१० को नई दिल्ली के शुभारम्भ समारोह में पहुंचेगी। इस मशाल की त्रिकोणाकार एल्मिनियम को कुंडलित आकार प्रदान किया गया है। इसको भारत के हर प्रान्त की रंगीन मिटटी से सजाया गया है। इसमें स्वर्ण-पत्र पर क्वीन एलिजाबेथ का मेसेज लिखा है। इस मशाल की उंचाई ६६४ मी मी तथा आधार ३४ मी मी चौड़ा है। इसका उपरी हिस्सा ८४ मी मी चौड़ा है , तथा इसका वजन १९०० ग्राम है।

इस बेटन में तकनिकी खूबियाँ--
  1. इससे तसवीरें और ध्वनि रिकार्ड कर सकते हैं।
  2. जी पी एस सुविधा- ग्लोबल पोजिशनिंग
  3. इसमें लगे लाइट इमिटिंग डायोड --जो विभिन्न देशों में उनके झंडे के अनुसार अपना रंग बदल लेते हैं।
  4. इस मशाल में टेक्स्ट मेसजिंग द्वारा मशाल वाहक को बधाई सन्देश भेजे जा सकते हैं।
आइये हम सब मिलकर इस खेल आयोजन को सफल बनाएं। ये हमारे देश की, अपने घर की इज्ज़त का सवाल है। बिना किसी पूर्वाग्रहों के हमें ख़ुशी-ख़ुशी अपने मेहमान देशों की मेजबानी करनी होगी और उमंग तथा भरपूर उत्साह के साथ इस खेल में शामिल अपने देश के खिलाड़ियों का उत्साह वर्धन करना है। ये हमारा कर्तव्य तथा समय की मांग है।

आज हमारी दिल्ली , यमुना की बाढ़ , डेंगू जैसी बिमारी तथा अयोध्या विवाद के संकट से जूझ रही है। हमारा नैतिक दायित्व है की हम गैरजरूरी विवादों को दरकिनार कर देश के हित में सोचे ।

जय हिंद ।