सुना था दिल्ली पठन-पाठन में अग्रणी है । यहाँ रोजगार के अवसर भी बहुत हैं । लेकिन अब तो हमारी दिल्ली -
- क्राइम में
- व्यापारियों को लूटने में
- इमारतों के ढ़हने में
- सड़क दुर्घटनाओं में
- ब्लू-लाइन से कुचलने में और
- बलात्कार जैसी घटनाओं में अग्रणी है
- दिल्ली की लडकियां जिम्मेदार हैं
- या दिल्ली का पुरुष वर्ग कुछ भिन्न मानसिकता रखता है
- या फिर सामाजिक ढाँचे में कहीं कोई कमी है
- या फिर कमज़ोर सुरक्षा व्यवस्था
- या फिर झोल-झाल कानूनी प्रक्रिया और व्यवस्था
- या फिर अशक्त और असंवेदनशील राजनैतिक व्यवस्था
Self defense -
- लड़कियों को Self defense अपनाना होगा। उन्हें स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी सुरक्षा कैसे करनी है , इसकी physical training लेनी चाहिए।
- अपने साथ pepper-spray [ मिर्ची पाउडर ] रखें , तथा बलात्कारी और छेड-छाड़ करने वालों से आपातकाल में निपटें ।
- कोई भी दुर्घटना हो उसकी FIR अवश्य दर्ज करायें । इससे बेसिक- पुलिसिंग में मदद मिलती है ।
- कोई भी व्यक्ति जन्मजात बलात्कारी नहीं होता। उसमें कुछ क्रिमिनल जींस होते हैं जो धीरे-धीरे विकसित होते हैं , यदि हर छोटे बड़े गुनाह की रिपोर्टिंग होगी तो बड़े गुनाहों को होने से रोका जा सकता है।
- लडकियां अकेले ना निकलें , एक ग्रुप बनाएं , और यदि कोई दुर्घटना होती है तो मिलकर रिपोर्ट करें तथा थोड़े थोड़े समय पर follow- up के लिए जाएँ तथा त्वरित कारवाई के लिए pressurize करें।
- चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा होना चाहिए ताकि मनचलों की हिम्मत ही न पड़े गुनाह करने की।
- पुलिस वालों का संवेदनशील रवैय्या होना चाहिए अपनी बहन बेटियों के लिए।
- रिपोर्ट लिखने में तथा कार्यवाई करने में तत्परता दिखायें तथा यथा संभव पूरा सहयोग दें जिससे महिलाएं ऐसी घटनाओं को पुलिस में रिपोर्ट करने में हिचकें नहीं तथा अपराधी खुले ना घूमें।
BPO में काम करने वाली लड़कियों को रात्री में जिस Cab से जाना होता है , उसमें GPS व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कम से कम गाडी किस दिशा में ले जाई गयी है ये पता लगाया सकता है । तथा समय से मदद के लिए पहुंचा जा सकता है।
कानूनी व्यवस्था-
- कानून में बलात्कार जैसी शर्मनाक घटनाओं के लिए सख्त सजा होनी चाहिए।
- त्वरित कारवाई करके अपराधी को शीघ्र ही सजा दिलानी चाहिए। [ Justice delayed is justice denied]
- ऐसी दुर्घटनाओं में Victim बहुत भयग्रस्त हो जाती है , तथा उसपर मानसिक दबाव भी बढ़ जाता है । मनोबल टूट जाता है । इसलिए कानूनी प्रक्रिया त्वरित तथा सहज होनी चाहिए जिससे पीडिता को बार-बार तिरस्कृत न होना पड़े।
- त्वरित एवं सख्त कार्यवाई अपराधी की संख्या भी कम करेगी तथा फलस्वरूप ज्यादा केसेज़ रिपोर्ट होंगे और इस समस्या का निदान हो सकेगा।
- जो सत्ता में है , जिसके पास ताकत है , वो चाहे तो , सब -कुछ कर सकता है। [ Where there is will , there is a way ]
- शीला जी का ये वक्तव्य की - " आप बताइये हम क्या कर सकते हैं " ---अत्यंत शर्मनाक है । यदि वो कुछ नहीं कर सकतीं तो अपनीं कुर्सी ही छोड़ दें ।
- पहले बिहार की बुरी स्थिति थी , आज नितिश जी के सद्प्रयासों से लडकियां सुरक्षित महसूस कर रही हैं । साइकिलों पर बैठकर स्कूल जा रही है। यदि कोई सही मायनों में विकास चाहे तो बिकुल किया जा सकता है।
आभार।