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Thursday, September 6, 2012

दशक का ब्लॉगर सम्मान--एक समीक्षा

नज़ाकत और नफासत की नगरी लखनऊ में हुए ब्लॉगर सम्मान पर असंख्य पोस्टें आ चुकी हैं अब तक ! मैंने तटस्थ रहने की बहुत कोशिश की लेकिन डॉ शास्त्री की पोस्ट आज पढने के बाद बेहद दुःख हुआ इसलिए तटस्थ रहना एक गुनाह समझा और अपने मन में आये विचारों को शब्द देना ज़रूरी समझा !

कहते हैं कि -"मुस्कुराईये की आप लखनऊ में हैं "--लेकिन ये क्या , नवाबों के शहर से लौटे अधिकाँश ब्लॉगर्स के चेहरे से मुस्कान मानो उड़नछू हो गयी हो !

आखिर ऐसा क्यों हुआ ?

सबसे पहले तो आयोजकों के अथक प्रयास के लिए अनेकों बधाईयाँ ! उसके बाद सभी सम्मानित लेखक और लेखिकाओं को ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं !

मेरे विचार से किसी भी प्रकार का ब्लॉगर सम्मलेन हो , ब्लॉगर्स को सबसे ज्यादा उत्सुकता एक दुसरे से मिलने और परिचय प्राप्त करने कि होती है , लेकिन जैसा कि मैंने जाना और पढ़ा , दूर-दराज़ से आये ज्यादातर ब्लॉगर बिना किसी परिचय के ही लौट गए , जिससे उनमें काफी निराशा देखने को मिली !

अतिथि देवो भव-- सबसे पहला कार्य तो आने वाले प्रत्येक ब्लॉगर को यथोचित सम्मान के साथ वार्म-वेलकम दिया जाना चाहिए था ताकि लौटने के बाद ब्लॉगर कि स्मृति में वो सुखद यादगार हमेशा बनी रहे !

डॉ रूपचन्द्र शास्त्री जी के आलेख पर जो पढ़ा वह अत्यंत खेदजनक है ! एक वरिष्ठ ब्लॉगर अपमानित और ठगा सा महसूस करे यह हम सभी कनिष्ठ ब्लॉगर्स के लिए दुर्भाग्य कि बात है ! डॉ शास्त्री को समुचित सम्मान मिलना चाहिए था !

डॉ पवन मिश्र, कानपुर जी ने कुछ प्रश्न पूछे जो बेहद विनम्रता से पूछे गए थे , उसका उत्तर भी विनम्रता से दिया जाना चाहिए था , लेकिन अफ़सोस कि ऐसा नहीं हुआ ! आपस में ही एक दुसरे पर कानूनी कार्यवाई किये जाने कि धमकी कुछ अशोभनीय एवं खेदजनक लगी !

मंगलायतन पर मनोज जी ने , पवन जी को जो उत्तर दिए वे बहुत कटुता से भरे हुए थे ! यही वही उत्तर थोड़ी मिठास लिए हुए होते तो ब्लॉगर्स कि गरिमा बढती !

वो कहते हैं न कि -"फल आने पर डालियाँ विनम्रता से झुक जाती हैं "

महेंद्र श्रीवास्तव जी के आलेख से शत प्रतिशत सहमत हूँ ! उस पर आई टिपण्णी और प्रति टिप्पणियां भी सार्थक लगीं, बस एक ही बात खेद जनक लगी कि ज्यादातर टिप्पणीकारों ने महेंद्र जी के शिखा का नाम लिखने पर आपत्ति जताई , जो अनुचित लगी मुझे !

महेंद्र जी कि आपत्ति जायज़ है ! मंच पर आसीन शिखा हो अथवा वहां आसीन कोई अन्य कनिष्ठ ब्लॉगर, उसे शिष्टाचारवश अपने से वरिष्ठ ब्लॉगर को सम्मान देना चाहिए था ! मंच पर अपनी कुर्सी छोड़कर अपने से बड़े को आदर देने से कोई छोटा नहीं हो जाता ! यदि आयोजक से कोई भूल-चूक हो भी रही थी तो वह उपस्थित अन्य सम्मानित समूह अपने बडप्पन का परिचय दे सकता था !

आयोजक ने भले ही ब्लॉगर्स का सम्मान किया हो , लेकिन आयोजक समूह का सम्मान तो वहां शिरकत करने वाले सभी अतिथि ब्लॉगर्स के आगमन से ही हुआ ! अतः कोई भी आयोजन हो आयोजक को सम्मलेन में आने वाले प्रत्येक अतिथि का पूरे मनोयोग से स्वागत-सत्कार करना चाहिए , ताकि वे मधुर-स्मृतियाँ संजो सकें !

किसी भी आयोजन में सबसे अहम् होता है -- आयोजन का खर्चा ! इसके लिए यदि आयोजक इसका पूरा खर्चा नहीं वहन कर सकता तो उसे एक छोटी धन-राशि सभी आमंत्रित सदस्यों से लेनी चाहिए थी, ताकि किसी को भी खाने-पीने और ठहरने कि असुविधा नहीं होती ! सभी एक दुसरे से मिल-बैठकर परिचय प्राप्त कर सकते थे और नए सम्बन्ध बनते , जिससे आपसी मृदुता बढती ! और आयोजन कि सार्थकता द्विगुणित हो जाती !

कुछ आलेखों पर रश्मि प्रभा जी की अति निंदा की गयी है , जो अनुचित लगी ! अनावश्यक रूप से किसी को बदनाम करना बहुत गलत है ! यदि वे कार्यक्रम में उपस्थित न हो सकीं तो उसके बहुत से कारण हो सकते हैं ! हो सकता है वे अस्वस्थ रही हों !  किसी की उपस्थिति पर प्रश्न-चिन्ह  लगाना अशिष्ट  लगा !

अन्य कई आलेखों में चित्रों द्वारा इस आयोजन कि झलकियाँ अत्यंत मोहक लगीं !

पुनः आयोजक समूह, सम्मानित लेखक , लेखिकाओं एवं वहां उपस्थित सभी मित्र ब्लॉगर्स को ढेरो बधाई एवं शुभकामनाएं !

बस ध्यान रहे -- "भूल से भी कोई भूल हो ना"

Zeal

Friday, May 18, 2012

दशक का चिट्ठाकार-- एक समीक्षा.

सर्व-प्रथम ब्लॉग-सम्मान आयोजित करने वाले ब्लॉगर श्री रवीन्द्र जी को बधाई एवं शुभकामनाएं इस आयोजन के लिए।

आजकल ब्लॉगजगत में गहमा-गहमी है। हर तरफ दशक का ब्लॉगर और दशक का चिट्ठा ही चर्चा का विषय बने हुए हैं। असंख्य आलेख आ चुके हैं इस पर। लेखकों में संतोष कम और असंतोष ज्यादा दिख रहा है। अतः यह ध्यान देने की ज़रुरत है की ऐसा क्यों है।

जज अथवा निर्णायक बनना एक अति-दुरूह कार्य है। इसके लिए "निष्पक्ष" होना पहली शर्त होती है। अर्थात निर्णायक मंडल को दोस्तीदारी और निज-हित से ऊपर उठकर इस सम्मान का सम्मान करना होगा , निर्णय और चयन प्रक्रिया के दौरान।

आचार्य चाणक्य के अनुसार , किसी भी कार्य को करने से पूर्व बहुत भली प्रकार से सोच बिचार लेना चाहिए की हम ये काम क्यों शुरू करने जा रहे हैं और इस कार्य से समाज को कितना लाभ हो रहा है।

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होना बहुत ज़रूरी है। जैसे चुनाव के दौरान EVM मशीन में घोटाले होते हैं , उस प्रकार नाम के आगे बने गोलों में मतदान करने और सही परिणाम के उल्लिखित होने पर संशय बना रहता है।

निज कटुता के चलते कुछ ब्लॉगर्स की टिप्पणियां हटा दी जा रही हैं और मोडरेट भी कर दी जा रही हैं। सूचना मिली है की कुछ लोगों द्वारा अपनी पसंद का नाम देने पर उसे दर्शाया तो गया लेकिन २४ घंटों के अन्दर उस नाम को हटा भी दिया गया। इस प्रकार की हरकतों से आयोजक की मंशा संशय के दायरे में आ जाती है। और उनकी निष्पक्षता पर संदेह भी होता है।

चुनाव प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होनी चाहिए। इसके लिए सर्वप्रथम एक नामों की सूची जारी करनी चाहिए । उसमें नामांकन , ब्लॉगर द्वारा स्वयं होना चाहिए। फिर उन नामों पर अन्य ब्लॉगर्स द्वारा वोटों के मिलने पर उनकी गणना होनी चाहिए। ब्लॉगर से ये अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए की वह अपना मत , अपने लिए इस्तेमाल कर सके। कभी-कभी यही एक मत निर्णायक साबित होता है।

जो संख्या अभी , दर्शायी जा रही है उस पर भी लोगों को संदेह है। अतः किसी के भी मन में आयोजक के प्रति कोई शक न आये इसके लिए मतदान कमेन्ट के माध्यम से होना चाहिए। जिसे सभी लोग देख सकें और अपने मन में किसी प्रकार का संशय न पालें।

बहुत से लोगों को यह भी आपत्ति है की इस सम्मान का नाम दशक का ब्लॉगर नहीं होना चाहिए, क्यों जो नाम सामने आये हैं उनमें से शायद ही किसी ने एक दशक पूरा किया हो। और कोई भी सम्मान उसके कार्य-काल की अवधी से नहीं अपितु उसकी योग्यता के आधार पर मिलता है। अतः मेरे विचार से इस समान का नाम " दशक का ब्लॉगर" न होकर "ब्लॉगर सम्मान--2011 हो तो बेहतर होगा। इससे एक लाभ यह भी होगा बुज़ुर्ग के साथ युवा ब्लॉगर्स को भी मौक़ा मिल सकेगा।

चूँकि मतदान करने वालों में युवा भी शामिल है और नवोदित भी शामिल है , जिसने दशक के चिट्ठाकारों को एक दशक तक पढ़ा ही नहीं है , अतः वे उनकी योग्यता से पूरी तरह परिचित ही नहीं हैं, फिर वे पूरे दशक में किये गए योगदान को जाने बगैर मतदान कैसे करेंगे? इस परिस्थिति में भी इसे दशक का नहीं बल्कि 2011 का सम्मान कहना ही ज्यादा उचित प्रतीत हो रहा है।

आयोजक को यदि अपने आयोजन को त्रुटी-रहित बनाना है तो आलोचनाओं को संज्ञान में लेना ही होगा। त्रुटियों को दूर करना होगा। चयन-प्रक्रिया पारदर्शी करनी होगी और इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि किसी के भी मन में द्वेष और वैमनस्य और निराशा न स्थान लेने पाये। क्योंकि हमारा उद्देश्य तो लेखकों को प्रोत्साहित करना है, उन्हें हतोत्साहित करना नहीं।

कुछ लेखक अपनी मर्यादाओं को लांघ रहे हैं । खुद को बेहतर और सुझाव देने वालों को लघुतर समझ , उनसे अपमान जनक भाषा में बात , दोषारोपण और कीचड उछाल रहे हैं । जो लेखनी का अपमान है। माँ सरस्वती का अपमान है। अक्षम्य है।

मेरे विचार से इस चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सफल बनाने के लिए इसे पुनः शुरू करना चाहिए, जिसमें आयोजन के नियम वा शर्तों का स्पष्ट उल्लेख करके ब्लॉगर्स द्वारा टिप्पणी के माध्यम से नामांकन आमंत्रित करना चाहिए।

एक निश्चित अवधी के बाद जब नामांकन-प्रक्रिया पूरी हो जाए तो चयन हेतू लोगों को मतदान के लिए आमंत्रित कीजिये ।

एक से ज्यादा वोटों को और बोगस वोटों को रोकने कि समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।


मैं अपनी पसंद के कुछ ब्लॉगर्स का नाम लिख रही हूँ। मेरी इच्छा है इन लेखक/लेखिकाओं के नामों को भी उस सूची में शामिल किया जाए।


१-वंदना गुप्ता
२-रचना
३-प्रतिभा सक्सेना
४-माहेश्वरी कनेरी,
५-जेन्नी शबनम,
६-फिरदौस,
७-शिल्पा मेहता,
८-अंशुमाला,
९-पल्लवी
१०-घुघूती बासूती,
११-पारुल,
१२-संगीता स्वरुप,
१३ संगीता पुरी,
१४- राजेश कुमारी,
१५-अदा
१६-रश्मि प्रभा
१७- सदा
१८-रश्मि रवीजा,
१९-विभा रानी श्रीवास्तव
२०-अंजू चौधरी
२१-मृदुला
२२-डॉ अरुणा कपूर
२३-सोनल रस्तोगी
२४- अनीता
२५-निर्मला कपिला
२५-रेखा श्रीवास्तव
२६-वाणी गीत
२७-अराधना
२८-निवेदिता
२९-वंदना अवस्थी दूबे
३०- कविता रावत
३१-क्षमा
३२- सुनीता शानू

३३-शोभना चौरे
आशा सक्सेना
आशा
जोगलेकर
साधना
वैद्य
रंजू भाटिया
मृदुला
प्रधान ,
-----------------------------------------

१- श्री भारत भूषण
२- पी सी गोदियाल
३-लोकेन्द्र सिंह राजपूत,
४ -महेंद्र वर्मा
५- प्रतुल वशिष्ठ
६- दिवस गौड़
७- दिनेश ( रविकर)
८- वाणभट्ट
९- वीरू भाई
१० संजय कटानवरे
११- अनूप शुक्ल
१२ रवि रतलामी
१३-अरविन्द मिश्र,
१४-अनवर जमाल,
१५-मंसूर अली
१६- अली
१७-ए एस मासूम।
१८-अमित श्रीवास्तव
१९-अरुण साथी
२०- कुंवर जी
२१-कुंवर कुसुमेश
२२ - अजय कुमार झा
२३ -रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
२४- चंद्रभूषण - गाफिल
२५- डॉ दराल,
२६- केवल राम
२७- संजय मो सम कौन
२८- कुश्वंश
२९- डॉ भोला-कृष्णा
३०-उन्मुक्त
३१-मनोज भारती
३२-मनोज ( विचार)
३३-सतीश पंचम
३४ -सुरेश चिपलुनकर
३५- संजय बोंगाडी
३६ -खुशदीप
३७- दिनेश राय दिवेदी
३८-सतीश सक्सेना
३९-राजेश उत्साही
४० -राकेश कुमार
४१- मुकेश पांडे (चन्दन)
४२-प्रवीण पण्डे
४३-प्रवीण शाह
४४-दीर्घतमा,
४५-पी एन सुब्रमन्यन
४६-जय कृष्ण तुषार
४७-सुरेन्द्र झंझट
४८-राहुल सिंह
४९-हंसराज सुज्ञ
५०-कैलाश शर्मा
५१-अलबेला खत्री
५२- डॉ श्याम गुप्त
५३-गिरीश बिल्लोरे
५४ -फिलिप शास्त्री
५५-दीपक बाबा
५६-अंतर सोहिल,
५७-महेंद्र श्रीवास्तव
५८- राजेन्द्र स्वर्णकार।

५९-कौशलेन्द्र।
६०- समीर लाल
६१- रजनीश झा।
६२-डॉ राजेंद्र तेला

६३-ललित शर्मा
६४-दीप पाण्डेय,
६५-विचार शून्य
६६
- अमित शर्मा
६७-हरदीप राणा 'कुंवर जी'
६८
-अविनाश चंद्र
६९-मुकेश कुमार सिन्हा,
७०
-आशीष राय
७१-रतन सिंह शेखावत
७२-यशवंत,
७३
-हिंदी ब्लॉग टिप्स,
७४
-चंद्रमौलेश्वर।
७५
-गिरधारी लाल खंकरियाल
७६-भारतीय नागरिक
अविनाश वाचस्पति
अरुण चन्द्र राय
हिमांशु,
अमरेन्द्र
त्रिपाठी।
सुनील
दत्त,
विश्वजीत
,
मान
सिंह पवार,
विनीत
कुमार सिंह
काजल
कुमार।
उदयवीर सिंह
सुबीर रावत।
दिलबाग विर्क
डॉ आशुतोष मिश्र।

मरणोपरांत भी ब्लॉगर्स को सम्मानित किया जाए--

१- डॉ अमर कुमार,
२- डॉ रूपेश श्रीवास्तव
३-हिमांशु मोहन

मुझसे अनजाने में कहीं कोई त्रुटी रह गयी हो तो क्षमा अपेक्षित है ।
सम्मान समारोह को बेहतर बनाने के लिए विद्वान् पाठकों कि राय आमंत्रित है।

Zeal