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Sunday, June 24, 2012

एक शरीफ प्रधानमंत्री की तलाश है---

नितीश ने मांग की है की एक शरीफ और सेक्युलर प्रधानमन्त्री होना चाहिए भारत का। मैंने तो बहुत सोचा , मुझे तो कांग्रेस के सिवा दूसरा कोई शरीफ और सेक्युलर दिखाई नहीं दिया। तो फिर २०१४ में लुटेरों को दुबारा जिता दिया जाये ? या फिर श्री श्री १००८ स्वामी नितीश कुमार को ही प्रधानमंत्री बना दिया जाए ?

राष्ट्रपति की तो मारा-मारी चल ही रही है। UPA , आनन्-फानन में अपना मनचाहा चुन ही लेगी, लेकिन प्रधानमन्त्री किसे बनाएं ?

Zeal

Thursday, March 8, 2012

मुळ-मुळ यादव की 'पंचर' साईकिल

६ दिसंबर को बजरंग दल के जिन दो वीर सैनानियों (कोठारी बंधुओं) ने सबसे पहले 'राम जन्म भूमि' पर भगवा झंडा फहराया था , उन्हें इस मुळ मुळ (मुलायायम यादव) सरकार ने पुलिस आदेश करके मरवा दिया था। धिक्कार है मुलायम सरकार को। यदि इस बार इन्होने ज़रा भी बेशर्मी की तो जैसे भ्रष्टाचारी कांग्रेस को उखाड़ कर फेंका गया है , वैसे ही इस ढुल-ढुल सी , मुळ मुळ सरकार को भी नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश की जनता ने अब पाठ पढाना सीख लिया है। पंजे की सारी उंगलियाँ तोड़ फेंकी , हाथी को दिखाया जंगल का रास्ता, भगवा को किया खबरदार , अब संभलो साईकिल वालों नहीं तो "पंचर" कर दिए जाओगे। -- वन्देमातरम।

Wednesday, March 7, 2012

देश का दुर्भाग्य...

भारत देश का ये दुर्भाग्य है की यहाँ की राजनीतिक पार्टियाँ सिर्फ अपने बारे में सोचती हैं। देश के बारे में सोचना उन्हें गुनाह लगता है। सपा और बसपा जैसे दल के नेताओं के पास इतनी बुद्धि ही नहीं है की वे राष्ट्र हित में सोच भी सकें। इनको तो ये भी नहीं पाता की जश्न कभी बन्दूक की गोलियों से नहीं मानना चाहिए। उस मासूम का गुनाह क्या था जिसकी मौत हो गयी। पत्रकारों की पिटाई क्यों की गयी। इतनी जल्दी यादव जी की पार्टी अपनी गुंडागर्दी दिखाएगी , ये मालूम न था। उत्तर प्रदेश की जनता ने कांग्रेस का बहिष्कार करके एक और अच्छा तो किया लेकिन गवारों के इस दल को जिताकर भारी भूल की है।

बीजेपी चाहती तो आसानी से इस समस्या का हल निकल सकता था। उन्हें अपने प्रधानमंत्री(मोदी) और उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री (सुश्री उमा भारती) का नाम स्पष्ट रूप से घोषित करना चाहिए था। गोल-मोल रखने से , ईर्ष्या द्वेष , आपसी फूट और षड्यंत्र की बू आती है। जब तक एक जुट नहीं होंगे तब तक गुंडा राज झेलना ही पड़ेगा। देश का धन निठाल्ले उड़ायेंगे और बाकि अपने स्विस खातों में जमा करते रहेंगे।

Tuesday, March 6, 2012

कांग्रेस की करारी हार -- सोनिया बेज़ार.

उत्तर प्रदेश वासियों ने निराश नहीं किया। कम से कम 'कांग्रेस' रुपी भेड़िया का बहिष्कार तो किया। राहुल का फ्रस्ट्रेशन ले डूबा कांग्रेस को। बेचारा बच्चा , इतना जिद्दी और गुस्सैल है की राम ही जाने , अब पचास सीटों मिलने पर क्या करेगा। खुर्शीद और सिद्धिकी की चुनावी नौटंकियाँ उलटी पड़ गयीं। मीडिया खरीदने का भी कोई लाभ नहीं मिला कांग्रेस को। समाजवादी पार्टी का 'लैपटॉप' बांटने का फंडा कारगर रहा। साईकिल सवार ही आगे रहे। भाजपा से उम्मीदें ज्यादा थीं। भगवा ही चाहिए। Let's hope for the best।

Sunday, February 19, 2012

जागरूक आवाम का शहर -- लखनऊ.

माना की आज शहर में सर्दी कुछ ज्यादा ही है, बादल भी छाये हैं , लेकिन आलस न करो लखनऊ वालों, आज आपके शहर में मतदान है , उठो, जागो , इस्तेमाल करो अपने कीमती मतों का। ४५ और ५५% नहीं, बल्कि ९५ से १०० % मतदान होने चाहिए। आज हर व्यक्ति बदलाव चाहता है , विकास चाहता है , जागरूक हो चुका है। कोई लाख कीमत अदा करे लेकिन वो बिकाऊ नहीं रह गया है, अपने होशो हवास से अपने मत का इस्तेमाल करता है। बहुत कुछ निर्भर करता है देश की युवा जनता पर। देखना है वे अपने मतों से किसे जिताते हैं। जितना 'परिपक्व' हमारे युवाओं की सोच होगी , उतना ही बेहतर चुनावी परिणाम आयेगे।

जय हो !

Friday, February 17, 2012

सत्ता का क्रूर मज़ाक...

राहुल विंसी गुस्सा है , मैं निराश हूँ । उसके गुस्से का कारण तो बस एक ही है की उसे आशातीत चुनावी परिणाम नहीं मिल रहे हैं। लेकिन मेरी निराशा के अनगिनत कारण हो गए हैं। यथा--
हर इंसान बिकाऊ क्यों हो गया है।
मुसलामानों की खरीद-फरोख्त कब बंद होगी।
मीडिया छिछोरेपन से कब बाज़ आएगा,
सिर्फ राहुल और प्रियंका को दिखाता है , अन्य पार्टियों को क्यों नहीं,
चुनाव आयोग पक्षपात क्यों कर रहा है,
मंत्री अपने पद की गरिमा क्यों नहीं समझ रहे,
जनता के साथ , सत्ता का क्रूर मज़ाक कब बंद होगा,
चाटुकार अपनी दुम हिलाना कब बंद करेंगे,
भारत में हो रहा राजनैतिक-घटियापन, विदेशों में क्यों नहीं होता।
लोकतंत्र की परिभाषा ये नेता कब समझेंगे।
मुसलामानों का स्वाभिमान कब जागेगा और उनके भी रक्त में उबाल कब आएगा। कब बनेंगे ये लोग भारतीय और कब लड़ेंगे अपने देश के लिए।

वन्दे मातरम् !

Thursday, February 16, 2012

चुनाव आयोग को दुबारा चुनौती

खुर्शीद के बाद बेनी प्रसाद वर्मा ने चुनाव आयोग को दुबारा चुनौती दी--"मुसलामानों का कोटा और बढाया जाएगा"--मुल्ले बिकते हैं बोलो खरीदोगे?--प्रश्न यह है की कांग्रेस मुल्लों को खरीद रही है या फिर मुल्ले ही मौज ले रहे हैं इस फ्रसट्रेटेड कांग्रेस के ? चुनावी रैलियों में अलबर्ट पिंटो ने हताश होकर आज परचा फाड़ा, कल शायद कुरता ही फाड़ बैठें। आप लोग सामने ना पड़ियेगा, राहुल जी गुस्से में हैं , कहीं आपके बाल ही न नोच डालें।

Wednesday, February 8, 2012

मुलायम का चुनावी समाजवादी मुद्दा.

वोट लूटने की खातिर , खिलवाड़ करते नेता। अब मुलायम महोदय का चुनावी स्टंट आया है की मुझे जिताओ , मैं सेंट्रेल की तरह स्टेट यूनीवरसिटी में भी प्रोफेसर्स की रिटायरमेंट की उम्र ६२ से ६५ वर्ष करवा दूंगा। ६२ ही ज्यादा है ६५ की क्या ज़रुरत है? क्या युवाओं को पढ़ाने का मौका नहीं मिलना चाहिए क्या? जब UGC में रिटायर्मेंट के बाद दो वर्ष की "प्रोफ़ेसर-अमेरिटस " की सुविधा है तो ६५ वर्ष करने की क्या आवश्यक है? उम्र बढ़ाकर युवा पीढ़ी को नौकरी के अवसरों से वंचित करना उचित नहीं लगता।

Monday, February 6, 2012

खुर्शीद का चुनावी विज्ञापन

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम जमात को लुभाने के लिए कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने सभी चुनावी आचार संहिता को धत्ता बताते हुए मुस्लिम-आरक्षण का विज्ञापन देने की चेष्टा की। लेकिन एलेक्शन-कमीशन ने इस प्रकार के घटिया 'लोलीपॉप' का विज्ञापन करके वोट लूटने पर रोक लगा दी है। कांग्रेस की दाल नहीं गली, क्योंकि बिना मुस्लिमों को लुभाए उन्हें वोट मिलना आसान नहीं।