लोग दावा कर रहे हैं की भारत देश एक सुपर पावर बन कर उभरेगा । सन २०२० तक जापान को पीछे छोड़ देगा और सन २०५० तक अमेरिका समेत पृथ्वी के सभी देशों को पीछे छोड़कर , सबसे ज्यादा Economically strong राष्ट्र बन जाएगा ।
लेकिन आरक्षण जैसी प्रथा का चलन अपने देश में होने के कारण , देश का विकास होना नामुमकिन सा लगता है । आजादी के बाद नेहरु द्वारा शूद्रों तथा पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू करना तथा वी पी सिंह द्वारा मंडल कमीशन जैसी योजनाओं ने देश को तकरीबन ३०-४० वर्ष पीछे धकेल दिया है । आरक्षण द्वारा कभी भी , किसी भी देश का अथवा समुदाय का विकास नहीं हो सकता। आरक्षण देकर तत्कालीन सरकार अपने दायित्वों से भागती है और अपने निजी स्वार्थ की सिद्धि के लिए एक समुदाय विशेष को प्रसन्न कर अपनी कुर्सी बचाए रखने की नाकाम कोशिश करती है । उनका स्वार्थ तो सिद्ध हो जाता है , लेकिन देश का विकास रुक जाता है ।
पिछड़े वर्गों को आरक्षण - पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के कारण ही वो कभी आगे नहीं आ पाते । उनके अन्दर एक अकर्मण्यता सी आ जाती है । वो आरक्षित सीटों को बपौती समझते हैं और अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सार्थक प्रयास करने से कतराते हैं। जिसके चलते पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली व्यक्ति भी गर्व के साथ सर उठाकर नहीं चल पाते क्यूंकि उनके साथ 'आरक्षण' का तमगा जुडा होता है । उनके स्वयं के प्रयासों को लोग आरक्षण द्वारा प्राप्त उपलब्धि कहकर नकार देते हैं , जिससे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व कुंठा का शिकार होते हैं और बहुत सी जिल्लत सहन करते हैं। प्रतिभाएं किसी भी प्रकार के आरक्षण की मोहताज नहीं होतीं।
अल्पसंख्यकों को आरक्षण - रंगनाथ मिश्रा जैसी रिपोर्टों में, जिसमें १५ % में से , १० % मुस्लिम समुदाय के लिए और शेष ५ % अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए आरक्षण की माँग की गयी है , अत्यंत बचकानी लगती है । अल्पसंख्यक होने के नाम पर आरक्षण को माँगना , भीख माँगने जैसा है । सभी के साथ 'भारतीय' होने का गर्व जुड़ा हुआ है , फिर अपने को कमज़ोर बताकर और ज्यादा की माँग करना उचित नहीं है । इस तरह से माँग करके हम हज़ारों अन्य प्रतिभाशाली भारतीयों का हक मारते हैं । इनका देखा-देखी अब महाराष्ट्रियन समुदाय ने भी अपने लिए आरक्षण की माँग बुलंद कर दी है । इस तरह हर समुदाय यदि माँग करेगा तब तो देश खंड-खंड में बँट जाएगा । अखंड-भारत में आरक्षण की ये माँग उसकी गरिमा और वृहत दृष्टि को संकुचित करती है ।
महिलाओं के लिए आरक्षण - आरक्षण देने के साथ ही हम ये साबित कर देते हैं की ये वर्ग विशेष किसी न किसी तरह से कमतर है । किसी भी वर्ग विशेष को आरक्षण देना उसका सरासर अपमान है । आज जो महिलाएं देश विदेश में , संसद में , अनेक संस्थानों में अपना परचम लहरा रही है वो किसी आरक्षण द्वारा नहीं आई हैं। प्रतिभाओं के विकास के लिए योजनायें बनानी चाहिए , लेकिन आरक्षण देकर किसी भी समुदाय को नाकारा बनाकर , तथा सब कुछ आसानी से सुलभ कराके , हम उसके जुझारू व्यक्तित्व को ही समाप्त कर देते हैं। महिलाएं भी आरक्षण की मोहताज नहीं । करना ही है तो उनके सामने आने वाली समस्याओं के निदान पर सकारात्मक योजनाओं की जरूरत है ।
गरीबों को आरक्षण -- अक्सर लोग कहेंगे आरक्षण सिर्फ गरीबों को मिलना चाहिए । नहीं , कतई नहीं मिलना चाहिए । गरीब जनता को आरक्षण कुछ नहीं दे सकता । अरबों का घोटाला रोककर , पूरे देश की गरीब जनता का आसानी से उद्धार किया जा सकता है । गरीबों की जरूरतों को समझने की जरूरत है और उस दिशा में अविलम्ब क्रियान्वयन की । उन्हें आरक्षण की भीख और सत्ता की सहानुभूति नहीं चाहिए। गाँव और कस्बे में अस्पताल , स्कूल और अच्छे शिक्षक चाहियें , आरक्षण नहीं।
आरक्षण द्वारा हम गरीब और अमीर के बीच के फर्क को और बड़ा करते हैं । इसी प्रकार पिछड़ी जाति को और पीछे धकेलते हैं । महिलाओं को आरक्षण देकर उनका स्वाभिमान छीनते हैं और अल्पसंख्यकों के नाम पर आरक्षण माँगकर हम उस समुदाय विशेष को अपमानित करते हैं।
आरक्षण मिलना भीख मिलने के समान है जो प्रतिभाशाली व्यक्तित्व पर एक बदनुमा दाग है और लोगों को संघर्ष से विमुख करता है । आरक्षण के कारण बहुत से सामान्य वर्ग वाले निर्दोष विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता है , काबिल होते हुए भी कुछ हासिल करने से वंचित रह जाते हैं। बेरोजगारी और कुंठा का शिकार होते हैं। इसलिए आरक्षण का दानव देश के विकास में एक ग्रहण जैसा है जो उसे आगे ले जाने के बजाये कई दशक पीछे ले जाता है।
आभार ।
लेकिन आरक्षण जैसी प्रथा का चलन अपने देश में होने के कारण , देश का विकास होना नामुमकिन सा लगता है । आजादी के बाद नेहरु द्वारा शूद्रों तथा पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू करना तथा वी पी सिंह द्वारा मंडल कमीशन जैसी योजनाओं ने देश को तकरीबन ३०-४० वर्ष पीछे धकेल दिया है । आरक्षण द्वारा कभी भी , किसी भी देश का अथवा समुदाय का विकास नहीं हो सकता। आरक्षण देकर तत्कालीन सरकार अपने दायित्वों से भागती है और अपने निजी स्वार्थ की सिद्धि के लिए एक समुदाय विशेष को प्रसन्न कर अपनी कुर्सी बचाए रखने की नाकाम कोशिश करती है । उनका स्वार्थ तो सिद्ध हो जाता है , लेकिन देश का विकास रुक जाता है ।
पिछड़े वर्गों को आरक्षण - पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के कारण ही वो कभी आगे नहीं आ पाते । उनके अन्दर एक अकर्मण्यता सी आ जाती है । वो आरक्षित सीटों को बपौती समझते हैं और अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सार्थक प्रयास करने से कतराते हैं। जिसके चलते पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली व्यक्ति भी गर्व के साथ सर उठाकर नहीं चल पाते क्यूंकि उनके साथ 'आरक्षण' का तमगा जुडा होता है । उनके स्वयं के प्रयासों को लोग आरक्षण द्वारा प्राप्त उपलब्धि कहकर नकार देते हैं , जिससे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व कुंठा का शिकार होते हैं और बहुत सी जिल्लत सहन करते हैं। प्रतिभाएं किसी भी प्रकार के आरक्षण की मोहताज नहीं होतीं।
अल्पसंख्यकों को आरक्षण - रंगनाथ मिश्रा जैसी रिपोर्टों में, जिसमें १५ % में से , १० % मुस्लिम समुदाय के लिए और शेष ५ % अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए आरक्षण की माँग की गयी है , अत्यंत बचकानी लगती है । अल्पसंख्यक होने के नाम पर आरक्षण को माँगना , भीख माँगने जैसा है । सभी के साथ 'भारतीय' होने का गर्व जुड़ा हुआ है , फिर अपने को कमज़ोर बताकर और ज्यादा की माँग करना उचित नहीं है । इस तरह से माँग करके हम हज़ारों अन्य प्रतिभाशाली भारतीयों का हक मारते हैं । इनका देखा-देखी अब महाराष्ट्रियन समुदाय ने भी अपने लिए आरक्षण की माँग बुलंद कर दी है । इस तरह हर समुदाय यदि माँग करेगा तब तो देश खंड-खंड में बँट जाएगा । अखंड-भारत में आरक्षण की ये माँग उसकी गरिमा और वृहत दृष्टि को संकुचित करती है ।
महिलाओं के लिए आरक्षण - आरक्षण देने के साथ ही हम ये साबित कर देते हैं की ये वर्ग विशेष किसी न किसी तरह से कमतर है । किसी भी वर्ग विशेष को आरक्षण देना उसका सरासर अपमान है । आज जो महिलाएं देश विदेश में , संसद में , अनेक संस्थानों में अपना परचम लहरा रही है वो किसी आरक्षण द्वारा नहीं आई हैं। प्रतिभाओं के विकास के लिए योजनायें बनानी चाहिए , लेकिन आरक्षण देकर किसी भी समुदाय को नाकारा बनाकर , तथा सब कुछ आसानी से सुलभ कराके , हम उसके जुझारू व्यक्तित्व को ही समाप्त कर देते हैं। महिलाएं भी आरक्षण की मोहताज नहीं । करना ही है तो उनके सामने आने वाली समस्याओं के निदान पर सकारात्मक योजनाओं की जरूरत है ।
गरीबों को आरक्षण -- अक्सर लोग कहेंगे आरक्षण सिर्फ गरीबों को मिलना चाहिए । नहीं , कतई नहीं मिलना चाहिए । गरीब जनता को आरक्षण कुछ नहीं दे सकता । अरबों का घोटाला रोककर , पूरे देश की गरीब जनता का आसानी से उद्धार किया जा सकता है । गरीबों की जरूरतों को समझने की जरूरत है और उस दिशा में अविलम्ब क्रियान्वयन की । उन्हें आरक्षण की भीख और सत्ता की सहानुभूति नहीं चाहिए। गाँव और कस्बे में अस्पताल , स्कूल और अच्छे शिक्षक चाहियें , आरक्षण नहीं।
आरक्षण द्वारा हम गरीब और अमीर के बीच के फर्क को और बड़ा करते हैं । इसी प्रकार पिछड़ी जाति को और पीछे धकेलते हैं । महिलाओं को आरक्षण देकर उनका स्वाभिमान छीनते हैं और अल्पसंख्यकों के नाम पर आरक्षण माँगकर हम उस समुदाय विशेष को अपमानित करते हैं।
आरक्षण मिलना भीख मिलने के समान है जो प्रतिभाशाली व्यक्तित्व पर एक बदनुमा दाग है और लोगों को संघर्ष से विमुख करता है । आरक्षण के कारण बहुत से सामान्य वर्ग वाले निर्दोष विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता है , काबिल होते हुए भी कुछ हासिल करने से वंचित रह जाते हैं। बेरोजगारी और कुंठा का शिकार होते हैं। इसलिए आरक्षण का दानव देश के विकास में एक ग्रहण जैसा है जो उसे आगे ले जाने के बजाये कई दशक पीछे ले जाता है।
आभार ।