आज़ादी के 71 साल हो गए लेकिन देश की माटी से पैदा होने वाला हर नेता, दलित-दलित ही खेलता है आज भी।
Showing posts with label reservation. Show all posts
Showing posts with label reservation. Show all posts
Thursday, August 16, 2018
Thursday, February 2, 2017
वीर भोग्या वसुंधरा
कुछ विद्वान् मित्रों का मत है कि आरक्षण से पहले जातिवाद को हटाया जाए ।
किन्तु जाति व्यवस्था से किसी को व्यक्तिगत नुक्सान नहीं है । किसी का अधिकार नहीं मारा जा रहा है । कोई ठाकुर , कोई बनिया , कोई कुर्मी , कोई बढ़ई है तो उससे फरक क्या पड़ता है । नाम दिव्या हो, सीमा हो, मोहन हो, राकेश हो , कोई फरक नहीं पड़ता । सब अपने आप में खुश हैं , कोई किसी का हक नहीं मार रहा , बशर्ते कि आरक्षण की तलवार न लटकी हो कीन्हों दो के कन्धों पर ।
जब आरक्षण नहीं होगा तो सभी को सामान अवसर मिलेगा । अपनी योग्यता से अपनी प्रतिभा सिद्ध कर ऊपर आया जा सकता है । अपना परचम लहराया जा सकता है । आगे आने का आधार मेरिट होना चाहिए ।
प्रतिभाओं के आगे सभी नतमस्तक होते हैं , किसी का किसी से द्वेष नहीं होता । यदि आरक्षण नहीं होगा तो जातिभेद होगा ही नहीं । सभी जतियाँ सामान हैं और वे सौहार्द के साथ इस भारत भूमि पर रहती हैं ।
जातियों को कलंकित करने का काम ये नेता करते हैं । अपने स्वार्थ में ये समाज के अनगिनत टुकड़े कर उनकी तरफ आरक्षण के टुकड़े फैंकते हैं । ये नेता ही आरक्षित जतियों से उनका स्वाभिमान छीनते हैं और अनारक्षित जातियों की प्रतिभाओं का गला घोंटकर असमानता और आपसी दुराचार पैदा कर हम पर राज करते हैं ।
बाहर आना होगा इस मृगतृष्णा से । आरक्षण नहीं होगा तो समस्त जातियाँ मिलजुल कर रहेंगी। अतः ये स्पष्ट है कि आरक्षण से जातिवाद का जहर फैलता है। जातियाँ स्वयं किसी प्रकार से किसी का नुक्सान नहीं करतीं ।
Friday, May 29, 2015
नपुंसकों का हिस्सा छीनकर गुंडों को दे दिया
अंबेडकर ने जातिवाद का बीज बोया,
कांग्रेस ने पैसठ साल तक पानी दिया
अब बीजेपी आकर खाद डाल रही है !
सरकारें कभी नहीं बदलती ,
केवल मतलबी चेहरे बदलते हैं
अंबेडकर के दिए ज़ख्म में,
कांग्रेसी चाकू से लहू रिसता रहा
बीजेपी ने आकर ज़ख्म में नमक डाल दिया !
डरपोक , मौकापरस्त सरकारों ने
गुज्जरों की अराजकता के आगे घुटने टेक दिए
इनकी जेब से क्या जाता है,
हमारा हिस्सा, इन पिस्सुओं को खैरात में दे दिया !
गुंडों को मिलेगा आरक्षण तो देश का ख़ाक विकास करेगा ?
कांग्रेस ने पैसठ साल तक पानी दिया
अब बीजेपी आकर खाद डाल रही है !
सरकारें कभी नहीं बदलती ,
केवल मतलबी चेहरे बदलते हैं
अंबेडकर के दिए ज़ख्म में,
कांग्रेसी चाकू से लहू रिसता रहा
बीजेपी ने आकर ज़ख्म में नमक डाल दिया !
डरपोक , मौकापरस्त सरकारों ने
गुज्जरों की अराजकता के आगे घुटने टेक दिए
इनकी जेब से क्या जाता है,
हमारा हिस्सा, इन पिस्सुओं को खैरात में दे दिया !
गुंडों को मिलेगा आरक्षण तो देश का ख़ाक विकास करेगा ?
Thursday, May 28, 2015
स्वर्ग में आरक्षण ...
सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण तो समाप्त कर ही दिया है , अब धीरे धीरे नौकरियों से भी समाप्त कर दिया जाएगा ! गुज्जरों, जाटों और दलितों को अब अपनी काबिलियत दिखानी होगी, प्लेट में हलवा सजाकर नहीं दिया जाएगा !
.
आरक्षण एक बार लो, बार बार नहीं , पहले शिक्षा में, फिर कॉम्पिटिटिव एक्साम्स में , फिर नौकरी में फिर पदोन्नति में , अरे कितनी लालच करोगे भाई ? सुरसा की तरह मुंह मत फाड़ो ! कहीं तो कॉमा, फुलस्टॉप लगाओ ! या स्वर्ग तक आरक्षण चाहिए !
Saturday, July 20, 2013
हो रहा भारत निर्माण --ज़रूर देखिये
Tuesday, September 4, 2012
दलितों के लिए खुशखबरी ..
Reservation quota in promotion has been approved by this 'Gutter' Government. This is the first time they have done somthing right ! I am very pleased and congratulate this Govt. headed by a loony / empty-headed Sardar because -
Ram Vilas Paswan and Mayawati are very happy. May their Souls rest in peace whenever they die the way politicians die.
I am sad too because this Gutter Govt. did not go for 100% reservation in favour of SC / ST. They should have done that to 100% reservation for SC / ST and history would have been created.
SC / ST enjoy the same, equal rights to destroy the nation. Hitherto, this privilege had been monopolised by so-called Savarnas. Right to destroy the nation has been democratised in a democratic manner.
Let us hope now even against all hopes, Ram Vilas Paswan and Mayawati shall no more curse Maharshi Manu for authoring the legendary Manusmriti. They have received / collected their dues very well.
Private sector shall prosper more as merit shall migrate to that sector in herds.
Population of talented NRIs shall rise by leaps and bounds as large number of so-called Savarnas are going to migrate abroad for greener pastures. THEN, THE ENTIRE NATION SHALL BECOME BIHAR OF KARPOORI THAKUR / LALLOOO YADAVA and I shall be proud of that.
Social divisions shall increase. However, there is nothing to worry about because the idiotology of UNITY IN DIVERSITY of this gutter-bound Congress Party shall take care of that effectively.
Future of the country is still bright !!!!!!
By Ramakant Tiwari
.
Private sector shall prosper more as merit shall migrate to that sector in herds.
Population of talented NRIs shall rise by leaps and bounds as large number of so-called Savarnas are going to migrate abroad for greener pastures. THEN, THE ENTIRE NATION SHALL BECOME BIHAR OF KARPOORI THAKUR / LALLOOO YADAVA and I shall be proud of that.
Social divisions shall increase. However, there is nothing to worry about because the idiotology of UNITY IN DIVERSITY of this gutter-bound Congress Party shall take care of that effectively.
Future of the country is still bright !!!!!!
By Ramakant Tiwari
.
Tuesday, August 21, 2012
अम्बेडकर , आरक्षण और राजनीति.
जब संविधान बना था तो दलितों को आरक्षण देने का प्राविधान मात्र १० वर्षों के लिए किया गया था, उसके बाद इसे हटा दिया जाना था, लेकिन गन्दी और सस्ती राजनीति करने वाले नेताओं ने इस आरक्षण को अपनी महत्वाकाक्षाओं को पूरा करने की सीढ़ी बना लिया। हिन्दुओं को बाँटने के लिए दलित को लगातार ये एहसास दिलाया की वो शोषित है और उस पर जुल्म हो रहा है । लेकिन अफ़सोस की बात तो ये हैं की दलितों का एक बड़ा तबका जो इस आरक्षण से लाभान्वित हो चुका है , वो आपस में ही राजनीति कर रहा है और आरक्षण का लाभ अन्य दलितों तक पहुँचने ही नहीं दे रहा और इसका खामियाजा भुगत रहे हैं बहुसंख्यक।
सरकार को किसी की भलाई से कुछ नहीं लेना देना, वो तो बस वोट-बैंक बनाने के लिए एक को लाभ देगी और एक का खून पीयेगी। सोचना तो आपको स्वयं ही होगा।
इज्ज़त के साथ जीना है तो आरक्षण का विरोध करो।
Zeal
Wednesday, March 2, 2011
आरक्षण और देश का विकास
लोग दावा कर रहे हैं की भारत देश एक सुपर पावर बन कर उभरेगा । सन २०२० तक जापान को पीछे छोड़ देगा और सन २०५० तक अमेरिका समेत पृथ्वी के सभी देशों को पीछे छोड़कर , सबसे ज्यादा Economically strong राष्ट्र बन जाएगा ।
लेकिन आरक्षण जैसी प्रथा का चलन अपने देश में होने के कारण , देश का विकास होना नामुमकिन सा लगता है । आजादी के बाद नेहरु द्वारा शूद्रों तथा पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू करना तथा वी पी सिंह द्वारा मंडल कमीशन जैसी योजनाओं ने देश को तकरीबन ३०-४० वर्ष पीछे धकेल दिया है । आरक्षण द्वारा कभी भी , किसी भी देश का अथवा समुदाय का विकास नहीं हो सकता। आरक्षण देकर तत्कालीन सरकार अपने दायित्वों से भागती है और अपने निजी स्वार्थ की सिद्धि के लिए एक समुदाय विशेष को प्रसन्न कर अपनी कुर्सी बचाए रखने की नाकाम कोशिश करती है । उनका स्वार्थ तो सिद्ध हो जाता है , लेकिन देश का विकास रुक जाता है ।
पिछड़े वर्गों को आरक्षण - पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के कारण ही वो कभी आगे नहीं आ पाते । उनके अन्दर एक अकर्मण्यता सी आ जाती है । वो आरक्षित सीटों को बपौती समझते हैं और अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सार्थक प्रयास करने से कतराते हैं। जिसके चलते पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली व्यक्ति भी गर्व के साथ सर उठाकर नहीं चल पाते क्यूंकि उनके साथ 'आरक्षण' का तमगा जुडा होता है । उनके स्वयं के प्रयासों को लोग आरक्षण द्वारा प्राप्त उपलब्धि कहकर नकार देते हैं , जिससे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व कुंठा का शिकार होते हैं और बहुत सी जिल्लत सहन करते हैं। प्रतिभाएं किसी भी प्रकार के आरक्षण की मोहताज नहीं होतीं।
अल्पसंख्यकों को आरक्षण - रंगनाथ मिश्रा जैसी रिपोर्टों में, जिसमें १५ % में से , १० % मुस्लिम समुदाय के लिए और शेष ५ % अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए आरक्षण की माँग की गयी है , अत्यंत बचकानी लगती है । अल्पसंख्यक होने के नाम पर आरक्षण को माँगना , भीख माँगने जैसा है । सभी के साथ 'भारतीय' होने का गर्व जुड़ा हुआ है , फिर अपने को कमज़ोर बताकर और ज्यादा की माँग करना उचित नहीं है । इस तरह से माँग करके हम हज़ारों अन्य प्रतिभाशाली भारतीयों का हक मारते हैं । इनका देखा-देखी अब महाराष्ट्रियन समुदाय ने भी अपने लिए आरक्षण की माँग बुलंद कर दी है । इस तरह हर समुदाय यदि माँग करेगा तब तो देश खंड-खंड में बँट जाएगा । अखंड-भारत में आरक्षण की ये माँग उसकी गरिमा और वृहत दृष्टि को संकुचित करती है ।
महिलाओं के लिए आरक्षण - आरक्षण देने के साथ ही हम ये साबित कर देते हैं की ये वर्ग विशेष किसी न किसी तरह से कमतर है । किसी भी वर्ग विशेष को आरक्षण देना उसका सरासर अपमान है । आज जो महिलाएं देश विदेश में , संसद में , अनेक संस्थानों में अपना परचम लहरा रही है वो किसी आरक्षण द्वारा नहीं आई हैं। प्रतिभाओं के विकास के लिए योजनायें बनानी चाहिए , लेकिन आरक्षण देकर किसी भी समुदाय को नाकारा बनाकर , तथा सब कुछ आसानी से सुलभ कराके , हम उसके जुझारू व्यक्तित्व को ही समाप्त कर देते हैं। महिलाएं भी आरक्षण की मोहताज नहीं । करना ही है तो उनके सामने आने वाली समस्याओं के निदान पर सकारात्मक योजनाओं की जरूरत है ।
गरीबों को आरक्षण -- अक्सर लोग कहेंगे आरक्षण सिर्फ गरीबों को मिलना चाहिए । नहीं , कतई नहीं मिलना चाहिए । गरीब जनता को आरक्षण कुछ नहीं दे सकता । अरबों का घोटाला रोककर , पूरे देश की गरीब जनता का आसानी से उद्धार किया जा सकता है । गरीबों की जरूरतों को समझने की जरूरत है और उस दिशा में अविलम्ब क्रियान्वयन की । उन्हें आरक्षण की भीख और सत्ता की सहानुभूति नहीं चाहिए। गाँव और कस्बे में अस्पताल , स्कूल और अच्छे शिक्षक चाहियें , आरक्षण नहीं।
आरक्षण द्वारा हम गरीब और अमीर के बीच के फर्क को और बड़ा करते हैं । इसी प्रकार पिछड़ी जाति को और पीछे धकेलते हैं । महिलाओं को आरक्षण देकर उनका स्वाभिमान छीनते हैं और अल्पसंख्यकों के नाम पर आरक्षण माँगकर हम उस समुदाय विशेष को अपमानित करते हैं।
आरक्षण मिलना भीख मिलने के समान है जो प्रतिभाशाली व्यक्तित्व पर एक बदनुमा दाग है और लोगों को संघर्ष से विमुख करता है । आरक्षण के कारण बहुत से सामान्य वर्ग वाले निर्दोष विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता है , काबिल होते हुए भी कुछ हासिल करने से वंचित रह जाते हैं। बेरोजगारी और कुंठा का शिकार होते हैं। इसलिए आरक्षण का दानव देश के विकास में एक ग्रहण जैसा है जो उसे आगे ले जाने के बजाये कई दशक पीछे ले जाता है।
आभार ।
लेकिन आरक्षण जैसी प्रथा का चलन अपने देश में होने के कारण , देश का विकास होना नामुमकिन सा लगता है । आजादी के बाद नेहरु द्वारा शूद्रों तथा पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू करना तथा वी पी सिंह द्वारा मंडल कमीशन जैसी योजनाओं ने देश को तकरीबन ३०-४० वर्ष पीछे धकेल दिया है । आरक्षण द्वारा कभी भी , किसी भी देश का अथवा समुदाय का विकास नहीं हो सकता। आरक्षण देकर तत्कालीन सरकार अपने दायित्वों से भागती है और अपने निजी स्वार्थ की सिद्धि के लिए एक समुदाय विशेष को प्रसन्न कर अपनी कुर्सी बचाए रखने की नाकाम कोशिश करती है । उनका स्वार्थ तो सिद्ध हो जाता है , लेकिन देश का विकास रुक जाता है ।
पिछड़े वर्गों को आरक्षण - पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के कारण ही वो कभी आगे नहीं आ पाते । उनके अन्दर एक अकर्मण्यता सी आ जाती है । वो आरक्षित सीटों को बपौती समझते हैं और अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सार्थक प्रयास करने से कतराते हैं। जिसके चलते पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली व्यक्ति भी गर्व के साथ सर उठाकर नहीं चल पाते क्यूंकि उनके साथ 'आरक्षण' का तमगा जुडा होता है । उनके स्वयं के प्रयासों को लोग आरक्षण द्वारा प्राप्त उपलब्धि कहकर नकार देते हैं , जिससे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व कुंठा का शिकार होते हैं और बहुत सी जिल्लत सहन करते हैं। प्रतिभाएं किसी भी प्रकार के आरक्षण की मोहताज नहीं होतीं।
अल्पसंख्यकों को आरक्षण - रंगनाथ मिश्रा जैसी रिपोर्टों में, जिसमें १५ % में से , १० % मुस्लिम समुदाय के लिए और शेष ५ % अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए आरक्षण की माँग की गयी है , अत्यंत बचकानी लगती है । अल्पसंख्यक होने के नाम पर आरक्षण को माँगना , भीख माँगने जैसा है । सभी के साथ 'भारतीय' होने का गर्व जुड़ा हुआ है , फिर अपने को कमज़ोर बताकर और ज्यादा की माँग करना उचित नहीं है । इस तरह से माँग करके हम हज़ारों अन्य प्रतिभाशाली भारतीयों का हक मारते हैं । इनका देखा-देखी अब महाराष्ट्रियन समुदाय ने भी अपने लिए आरक्षण की माँग बुलंद कर दी है । इस तरह हर समुदाय यदि माँग करेगा तब तो देश खंड-खंड में बँट जाएगा । अखंड-भारत में आरक्षण की ये माँग उसकी गरिमा और वृहत दृष्टि को संकुचित करती है ।
महिलाओं के लिए आरक्षण - आरक्षण देने के साथ ही हम ये साबित कर देते हैं की ये वर्ग विशेष किसी न किसी तरह से कमतर है । किसी भी वर्ग विशेष को आरक्षण देना उसका सरासर अपमान है । आज जो महिलाएं देश विदेश में , संसद में , अनेक संस्थानों में अपना परचम लहरा रही है वो किसी आरक्षण द्वारा नहीं आई हैं। प्रतिभाओं के विकास के लिए योजनायें बनानी चाहिए , लेकिन आरक्षण देकर किसी भी समुदाय को नाकारा बनाकर , तथा सब कुछ आसानी से सुलभ कराके , हम उसके जुझारू व्यक्तित्व को ही समाप्त कर देते हैं। महिलाएं भी आरक्षण की मोहताज नहीं । करना ही है तो उनके सामने आने वाली समस्याओं के निदान पर सकारात्मक योजनाओं की जरूरत है ।
गरीबों को आरक्षण -- अक्सर लोग कहेंगे आरक्षण सिर्फ गरीबों को मिलना चाहिए । नहीं , कतई नहीं मिलना चाहिए । गरीब जनता को आरक्षण कुछ नहीं दे सकता । अरबों का घोटाला रोककर , पूरे देश की गरीब जनता का आसानी से उद्धार किया जा सकता है । गरीबों की जरूरतों को समझने की जरूरत है और उस दिशा में अविलम्ब क्रियान्वयन की । उन्हें आरक्षण की भीख और सत्ता की सहानुभूति नहीं चाहिए। गाँव और कस्बे में अस्पताल , स्कूल और अच्छे शिक्षक चाहियें , आरक्षण नहीं।
आरक्षण द्वारा हम गरीब और अमीर के बीच के फर्क को और बड़ा करते हैं । इसी प्रकार पिछड़ी जाति को और पीछे धकेलते हैं । महिलाओं को आरक्षण देकर उनका स्वाभिमान छीनते हैं और अल्पसंख्यकों के नाम पर आरक्षण माँगकर हम उस समुदाय विशेष को अपमानित करते हैं।
आरक्षण मिलना भीख मिलने के समान है जो प्रतिभाशाली व्यक्तित्व पर एक बदनुमा दाग है और लोगों को संघर्ष से विमुख करता है । आरक्षण के कारण बहुत से सामान्य वर्ग वाले निर्दोष विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता है , काबिल होते हुए भी कुछ हासिल करने से वंचित रह जाते हैं। बेरोजगारी और कुंठा का शिकार होते हैं। इसलिए आरक्षण का दानव देश के विकास में एक ग्रहण जैसा है जो उसे आगे ले जाने के बजाये कई दशक पीछे ले जाता है।
आभार ।
Subscribe to:
Posts (Atom)
