Wednesday, January 30, 2013

अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता

इस देश की सरकार के चलते अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पूरी तरह छीनी जा चुकी है ! शिंदे अगर 100 करोड़ हिन्दुओं को आतंकवादी कह दें तो हिन्दुओं की आत्मा को ठेस पहुंची है , इससे किसी को कोई सरोकार नहीं ! किसी प्रकार का कोई ऐक्शन नहीं लिया गया ! लेकिन कमल हासन की एक निर्दोष फिल्म 'विश्वरूपम' से चंद कट्टर मुसलामानों की बिना मतलब आहत होती भावना को बहुत तूल दिया जा रहा है ! मुस्लिम वोटों की राजनीति ने एक अच्छे कलाकार को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है !

सलमान रुश्दी , तस्नीमा नसरीन और अब कमल हासन ! मुसलमानों को आईना दिखाने वालों का बहुत बुरा हश्र किया जा रहा है!

सरकार का अत्याचार अब बढ़ता ही रहा है !

प्रधानमन्त्री कौन?

शेर ने चुनाव जीतकर ये बता दिया की दरबार हमारा है
अब तुम चूहे को राजा बनाओ तो ये दुर्भाग्य तुम्हारा है !

Zeal

Sunday, January 27, 2013

मुझे तोड़ लेना वनमाली...

चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर, हे हरि, डाला जाऊँ

चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!

मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जावें वीर अनेक।

-माखनलाल चतुर्वेदी

जय भगवा

भगवा शब्द इतना पवित्र है की आतंकवादी के आगे लिख जाने से उसका अर्थ 'राष्ट्रवादी' हो जाता है !--- गर्व से कहिये हम 'भगवा-आतंकवादी' हैं ! अब हम मिलकर भगवा-हिन्दू-राष्ट्र बनायेंगे!

जय भगवा
जय भगवा-राष्ट्र

Friday, January 25, 2013

तेज तम अंश पर , कान्हा जिमी कंस पर..

इंद्र जिमि जृंभपर ! बाडव सुअंभपर ! रावण सदंभपर ! रघुकुल राज है … !
पौन वारिवाह पर ! संभु रतिनाह पर ! ज्यो सहसवाहु पर !राम द्विज राज है … !
दावा द्रुमदंड पर ! चिता मृगझुंड पर ! भूषण वितुंड पर ! जैसे मृगराज है … !
तेज तमंअंस पर ! कन्न्ह जिमि कंस पर ! त्यों म्लेंच्छ बंस पर ! सेर शिवराज है … !
कवि भूषण 

क्या यही है गणतंत्र भारत का ?

आजादी मिले 65 वर्ष बीत गए और संविधान बने 63 वर्ष। लेकिन क्या भारतवर्ष में तरक्की हुयी है? हम जहाँ थे वहीँ हैं या फिर और पीछे चले गए हैं ? इतने वर्षों में क्या तरक्की की है हमने ?

अशिक्षित बच्चों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है , ये नहीं जानते की 'गणतंत्र दिवस' और स्वतंत्रता दिवस क्या है। उनके लिए तो इस दिन लड्डू मिल जाते हैं बस यही है इसकी अहमियत।

आधी आबादी जो भारत की सड़कों पर पैदा होती है और फुटपाथ किनारे दम तोड़ देती है क्या ये गणतंत्र दिवस उनके लिए भी है ?

ये झंडा रोहण बड़े-बड़े आफिस , दफ्तरों और संस्थानों तक सीमित है। क्या लाभ इस दिवस का ,जब तक हर नागरिक खुशहाल न हो , स्वस्थ न हो , निर्भय न हो और अनेक अधिकारों से वंचित न हो तब तक।

आजादी के समय नेहरू ने देश को हिन्दुस्तान और पाकिस्तान में बांटा। आज ये विदेशी सरकार अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के नाम पर देशवासियों को बाँट रही है।

देश के लिए जज्बा ही कम हो गया है ,

लोगों के दिलों में स्वाभिमान भी मर रहा है,

अपने अधिकारों के लिए लड़ना भी छोड़ दिया है,

आवाज़ ऊंची करने में भी सहमने लगे हैं देशवासी,

अब ये कहने में भी डरते है की 'आजादी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है',

अब सरकार के अत्याचार से डरकर 'खिलाफत' और "असहयोग आन्दोलन" भी नहीं करते,

एक विदेशी महिला २ अरब जनता को अपने इशारों पर नचा रही है और हम "भारत छोडो" कहते हुए भी डरते हैं,

रामलीला मैदान में 'जलियावाला बाग़ काण्ड' दोहराया जाता है और हम चुप रह जाते हैं।

मीडिया बिकी हुयी है , लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छिनी जा रही है , क्या हम वाकई आजाद भारत में रह रहे हैं ?

अब देश में वालमार्ट लाया जाएगा , अब 'दांडी मार्च' नहीं होते। स्वदेशी से किसी को कोई लगाव नहीं ।

अब साधू संतों और भगवा का अपमान किया जाता है।

अब हमारे पवित्र ग्रंथों पर को बैन लगाने की जुर्रत करते हैं कुछ देश।

भारत में आतंकवादियों को सजा नहीं दी जाती।

हाथी ढकने पर करोड़ों व्यय पर गरीबों को कम्बल नहीं दी जाती ।

किसान आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री के चेहरे पर शिकन नहीं आती ।

  64 सालों का गणतंत्र !! गजब है हमारी उपलब्धियां !

धन्य है भारत ! धन्य हैं भारतवासी!

कभी-कभी देश के बारे में सोचा भी कीजिये ...

"गणतंत्र की शुभकामनाएं" कहकर खानापूर्ति न कीजिये...

Zeal

Thursday, January 24, 2013

वे भयभीत हैं...

कांग्रेस पार्टी आतंकित है , आजकल वह कॉकरोच से भी डर जाती है इसीलिए भगवा जैसे पवित्र रंग से भी आतंकित हो रही है।

मेरे विचार से इस डरी हुयी जमात को और ज्यादा आतंकित करना चाहिए ! भाजपा को अपनी पार्टी का एक ड्रेस-कोड बनाना चाहिए और पार्टी सदस्यों को भगवा शॉल और सदरी का प्रयोग करना चाहिए ताकि इन देशद्रोहियों की ज़बान लड़खड़ाये कुछ बकने से पहले!

Zeal